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अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिका का बोलने का अधिकार कमजोर हो रहा है

हाल में अमेरिका संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन पर लांछन लगाने में व्यस्त है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में चीन पर कालिख पोती। इसके अलावा, उन्होंने महामारी की रोकथाम में अमेरिका की सफलता की अत्यधिक प्रशंसा करने के साथ बढ़ा-चढ़ाकर यह कहा कि अमेरिका टीके के अनुसंधान में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है और महामारी शीघ्र ही खत्म हो जाएगी। और ज्यादा हास्यपद बात है कि उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार हमेशा नागरिकों को प्राथमिकता देती है, विभिन्न देशों को अमेरिका से सीखना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप की बात बिल्कुल बेहूदा है। तथ्य यह है कि अमेरिका में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संख्या 80 लाख होने वाली है और मौत के मामलों की संख्या 2.1 लाख से अधिक हो चुकी है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथोनी फौसी ने हाल में कहा कि अगर कारगर रोकथाम नहीं की जाती है, तो इस साल सर्दियों में अमेरिका में मौत के मामलों की संख्या 4 लाख के पार हो जाएगी। तथाकथित “सबसे शक्तिशाली” देश होने के नाते अमेरिका में महामारी की स्थिति सचमुच खराब है। इस स्थिति में ट्रंप महामारी की रोकथाम पर ध्यान देने के बजाय डींग मारने में ज्यादा व्यस्त हैं।

अमेरिका में महामारी कई महीने से फैल रही है, लेकिन अभी तक अमेरिका में टेस्ट करने की पर्याप्त क्षमता नहीं है। क्या यह नागरिकों को प्राथमिकता देने का व्यवहार है? अमेरिकी सरकार ने शेयर बाजार को बचाने के लिए खरबों डॉलर पानी की तरह बहा दिये, लेकिन महामारी की रोकथाम में कितना खर्च किया?

महामारी के अलावा, अमेरिका ने मानवाधिकार और शिनच्यांग जैसे मुद्दों पर भी चीन पर कालिख पोतने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका को समर्थन नहीं मिला। 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस के दौरान क्यूबा ने 45 देशों की ओर से भाषण देते हुए शिनच्यांग वेवुर स्वायत्त प्रदेश में आतंकवाद और उग्रवाद के विरोध में चीन के कदमों का समर्थन किया।

भाषण में कहा गया है कि सभी देश मानवाधिकार को राजनीतिकरण बनाने और दोहरा मापदंड का दृढ़ विरोध करते हैं। विभिन्न पक्षों को वार्ता और सहयोग के जरिए मानवाधिकार की रक्षा करनी चाहिए। चीन सरकार नागरिकों को प्राथमिकता देते हुए आर्थिक और सामाजिक विकास बढ़ाती है, गरीबी उन्मूलन करती है, लोगों का जीवन स्तर उन्नत करती है, मानवाधिकार की रक्षा करती है, यह वाकई प्रशंसनीय है।

हम देख सकते हैं कि अमेरिका ने मानवाधिकार के मुद्दे पर चीन पर आरोप लगाया है, लेकिन इतने सारे देशों ने एक साथ अमेरिका का विरोध किया। अमेरिका को समर्थन न मिलने का कारण है कि शुरू से आखिर तक अमेरिका झूठ बोल रहा है।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)