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अमेरिका तिब्बत मुद्दे से चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप न करे - चीन

अमेरिका को तिब्बत मुद्दे का प्रयोग कर चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बंद करना चाहिए, तिब्बत के विकास और स्थिरता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और “तिब्बत की स्वतंत्रता”वाली शक्तियों का चीन विरोधी अलगाव कार्रवाई का समर्थन नहीं करना चाहिए। चीन अपने हितों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने 20 अक्तूबर को पेइचिंग में आयोजित नियमित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। 

रिपोर्ट के अनुसार, तथाकथित”तिब्बत निर्वासित सरकार” ने 16 तारीख को बयान जारी कर कहा कि उसके सरगना लोब्सांग सांगे ने उस दिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय में तथाकथित “तिब्बत मामले के विशेष समन्वयक” और सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ए डेस्ट्रो से मुलाकात की। 

चीनी प्रवक्ता चाओ ने कहा कि तिब्बत मामला बिलकुल चीन का अंदरूनी मामला है, इसमें किसी भी बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप को कतई मंजूर नहीं किया जा सकता। अमेरिका का कथाकथित “तिब्बत मामले के विशेष समन्वयक” स्थापित करना बिलकुल राजनीतिक खेल है, जिसका उद्देश्य चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करना और तिब्बत के विकास और स्थिरता को नुकसान पहुंचाना है। चीन हमेशा से इसका विरोध करता है और कभी स्वीकार नहीं करेगा। चीन ने अमेरिका के सम्मुख गंभीरता से मामला उठाया है।

चाओ लीच्येन ने कहा कि तथाकथित”तिब्बत निर्वासित सरकार” अलगाववादी राजनीतिक संगठन है, जो “तिब्बत की स्वतंत्रता” को बखूबी अंजाम देना चाहता है। यह चीन के संविधान और कानून का बिलकुल उल्लंघन है और इसे विश्व में किसी देश ने स्वीकार नहीं किया है। लोब्सांग सांगे इस संगठन के सरगना के रूप में चीन का विरोध करने में सक्रिय हैं। चीन किसी भी देश के सरकारी व्यक्ति के लोब्सांग सांगे के साथ किसी भी तरीके वाले संपर्क का दृढ़ता के साथ विरोध करता है।
( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )