China

क्या चीन का मुकाबला कर उससे पैसे कमाने के इच्छुक मॉरिसन जैसे नेता पागल हैं ?

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर चेहरा बदलने में निपुण राजनीतिज्ञों में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन सबसे आगे हैं।कॉमिक चित्रमामले को लेकर उन्होंने चीन से माफ़ी मांगने को कहा। लेकिन फिर, उनका चेहरा एकदम बदल गया। 3 दिसम्बर को उन्होंने सार्वजनिक तौर पर चीन के साथ रचनात्मक संपर्ककरने की आशा जतायी और कहा कि चीन के साथ संबंध आपसी लाभ वाले हैं, जो दोनों देशों के लिए अच्छे हैं।

एक तरफ़ ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री चीन को बदनाम करते हैं, और दूसरी तरफ़ चीन से पैसे कमाना चाहते हैं। क्या वे पागल हो गए हैं? वास्तविकता नाटक से ज्यादा बेतुकी है। सत्ता में आने के बाद दो साल में मॉरिसन ने सिलसिलेवार सट्टेबाज़ी नीतियां अपनाईं। यानी कि राजनीतिक स्तर पर वे अमेरिका के पीछे अनुसरण करते हुए कभी-कभार चीन का मुकाबला करते हैं। लेकिन आर्थिक स्तर पर वे चीनी विकास के लाभ को साझा करना चाहते हैं। उनकी इस प्रकार की कार्रवाई पर आधारित गलत नीतियों से ऑस्ट्रेलिया गलत रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

तथ्यों से जाहिर है कि मॉरिसन का अभिनय एक चालाक राजनीतिज्ञ का तमाशा है, जो अपने राजनीतिक हितों के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। इसके पीछे शीत युद्ध विचारधारा और वैचारिक पक्षपात की वजहें भी मौजूद हैं। वे अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अमेरिका के पीछे चलते हैं। 

अमेरिकी अख़बार “न्यूयॉर्क टाइम्स” ने हाल ही में एक विश्लेषण लेख में कहा कि ऑस्ट्रेलिया इसलिए दक्षिण चीन महासागर, हांगकांग, शिनच्यांग आदि प्रादेशिक भूमि से संबंधित मुद्दों पर चीन का मुकाबला करता है, क्योंकि वह अमेरिका के सामने अपना मूल्य दिखाना चाहता है। इसका लक्ष्य अपने “बड़े भाई”को खुश करने के लिए चीन को उत्तेजित करना है। 

लेकिन क्या मॉरिसन को अभिनय से कोई फायदा मिला है? पूर्व ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक टोनी केविन ने हाल में लेख लिख कर कहा कि चीन के प्रति मॉरिसन की नीति से ऑस्ट्रेलिया पूर्व का स्थिर बाजार खो देगा, उसका स्थान अमेरिकी और यूरोपीय निर्यातक लेंगे। लेकिन इसके साथ ही वे मीठी आवाजों से ऑस्ट्रेलिया का समर्थन करेंगे और सहानुभूति व्यक्त करेंगे।“लेकिन वास्तव में हमारे पास कोई समर्थक नहीं रहा।” 
   
राजनीतिक स्वार्थों की खोज में सक्रिय मॉरिसन जैसे लोगों को अच्छी तरह सोचना चाहिए कि क्या वे चीन के साथ गतिरोध की कीमत को सहन कर सकते हैं? इधर के सालों में चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य स्थल बना रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, 2019 में चीन के प्रति ऑस्ट्रेलिया का निर्यात अपने कुल निर्यात का 38.2 प्रतिशत था, उसके और चीन के बीच व्यापारिक संतुलन की वृद्धि दर 51.1 फीसदी थी। ऑस्ट्रेलियाई अर्थशास्त्रियों के विश्लेषण के मुताबिक, अगर चीन-ऑस्ट्रेलिया व्यापार 95 प्रतिशत घटा, तो इस देश की जीडीपी में 6 प्रतिशत की गिरावट आएगी। क्या मॉरिसन जैसे लोगों को चीन जैसा दूसरा देश मिल सकता है, जिसका बाजार अपार निहित शक्ति से भरा है?  
   
ऑस्ट्रेलिया बार-बार चीन के मूल हितों और महत्वपूर्ण चिंता वाले मुद्दों पर चीन का मुकाबला करता है, जिससे दोनों देशों के संबंध लगातार खराब हो रहे हैं और आर्थिक व्यापारिक सहयोग  भी बाधित हुआ है। चीन समान खुलेपन और विकास पर कायम रहता है, और विभिन्न देशों के साथ आपसी लाभ वाले सहयोग में जुटा रहा है। लेकिन इसकी एक पूर्वशर्त है कि आपसी सम्मान करना और एक-दूसरे के प्रति समानता के साथ व्यवहार करना।

मॉरिसन ने चीन के साथ संपर्क करने की बात कही। लेकिन अभिनेता के रूप में अगर वे चीन के साथ आपसी लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें जरूर अपनी सदिच्छा दिखानी पड़ेगी। वास्तव में पश्चिमी ताकतों में चीन-विरोधी नाटकों में ऑस्ट्रेलिया केवल एक छोटा सा पात्र है। एक तरफ वह चीन से लाभ हासिल करना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ चीन का विरोध भी नहीं छोड़ना चाहते हैं। इस प्रकार की कार्रवाई को चीनी लोग कतई मंजूर नहीं करेंगे। हम मॉरिसन जैसे लोगों को सपने न देखने की सलाह देना चाहते हैं।
( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )


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