Australia

चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से ऑस्ट्रेलिया को कोई फायदा नहीं

चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के चलते हाल में ऑस्ट्रेलिया की सोशल मीडिया में चीन के खिलाफ एक सूची प्रसारित हो रही है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की 41 वाइन कंपनियों के नाम लिखे हुए हैं, जिनमें चीनी पूंजी समाहित है।

द ऑस्ट्रेलियन अखबार ने रिपोर्ट की कि इस सूची पर वैश्विक चर्चा हो रही है। कुछ लोगों ने सरकार से पारदर्शिता बढ़ाकर चीनी पूंजी वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की, जबकि समझदार नेटिजनों ने कहा कि चाहे पूंजी कहीं से भी आती हो, इन कंपनियों को ऑस्ट्रेलियाई लोग चलाते हैं और ऑस्ट्रेलियाई लोगों को यहां से वेतन मिलता है। इसलिए उनके उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का कोई फायदा नहीं है।

लेकिन ऑस्ट्रेलिया के व्यवहार से चीन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, इसके विपरित ऑस्ट्रेलिया जैसे छोटे व्यापारिक देश को नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि चीन ऑस्ट्रेलिया का मुख्य निर्यात गंतव्य देश है, जबकि चीन के बहुत कम उत्पादों का ऑस्ट्रेलिया में निर्यात होता है।

वास्तव में ऑस्ट्रेलिया के बहुत सारे उद्यमों में चीनी पूंजी समाहित है, जो ऑस्ट्रेलियाई लोगों के कल्पना से काफी ज्यादा है। ये उद्यम ऑस्ट्रेलियाई लोगों के जीवन के हर क्षेत्रों से जुड़े हैं, जैसा कि स्वीसे, एंसैल, बेलेमी आदि।

ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर कॉलिन मैककल्स ने कहा कि चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाना एक बेवकूफी भरी कार्रवाई है, जिससे ऑस्ट्रेलिया को खुद को नुकसान पहुंचेगा। कुछ ऑस्ट्रेलियाई लोग सोचते हैं कि चीन उनका सम्मान नहीं करता, लेकिन तथ्य है कि चीन को सिर्फ सम्मान चाहिए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इसे नज़रअंदाज़ किया।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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