China

पारिस्थितिक सभ्यता वाले विचार के अंतर्गत चीन का विकास रास्ता सही

20वीं शताब्दी के 70 के दशक में दक्षिण पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत के हूचओ शहर की आनची काउंटी में खनन विकास से पर्यावरण को गंभीरता से नुकसान पहुंचा। 15 अगस्त, 2005 को तत्कालीन चच्यांग प्रांत के शीर्ष नेता के रूप में शी चिनफिंग ने आनची काउटी के य्वीत्सुन गांव का निरीक्षण दौरा किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ अमूल्य संपत्ति हैं। यह पारिस्थितिक सभ्यता वाले विचार है। 

गत 15 सालों में य्वीत्सुन गांव इस विचार के अंतर्गत जंगल को नष्ट करने, खदान विकास करने वाला रास्ता छोड़ कर पारिस्थितिक संरक्षण वाला तरीका अपनाया। अब यह छोटा गांव चीन में सुन्दर गांव के नाम से सुप्रसिद्ध है, जो निवास, उद्योग और पर्यटन के विकास का अनुकूल स्थल बन चुका है।   

 पारिस्थितिक सभ्यता वाले विचार न केवल चच्यांग प्रांत में, बल्कि पूरे चीन में लागू किया जा रहा है। ख़ास कर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस (8 नवम्बर 2012) के बाद से लेकर आज तक, पारिस्थितिक सभ्यता संबंधी शीर्ष स्तर के डिजाइन और प्रणालीबद्ध निर्माण में तेज़ी लाने की वजह से चीन में पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण में उल्लेखनीय कामयाबियां प्राप्त हुईं।

चीन में वन रोपण में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं। साल 2019 में देश भर में वन रोपण का क्षेत्रफल 73.9 लाख हेक्टेयर पूरा किया गया, जो साल 2012 की तुलना में 25.3 प्रतिशत बढ़ा। अमेरिकी राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अन्तरिक्ष प्रशासन (नासा) आदि संस्थाओं के उपग्रह आंकड़ों से पता चला कि दुनिया भर में सन् 2000 से 2017 तक वन रोपण का क्षेत्रफल 5 प्रतिशत बढ़ा है, इसमें चीन का योगदान करीब एक चौथाई है, जो विश्व में अग्रिम है।  

चीन में नीले आसमान की रक्षा वाला युद्ध हो रहा है। वायु प्रदूषण नियंत्रण में चीन दुनिया का सबसे तेज देश बन गया है। साल 2019 में देश भर के प्रमुख शहरों में पीएम 2.5 की औसत सांद्रता साल 2013 की तुलना में 43% घट गई। 

चीन में ऊर्जा संरक्षण लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। 2012 की तुलना में 2019 में जीडीपी की प्रति यूनिट ऊर्जा की खपत में 24.6 फीसदी की गिरावट आई है। नवम्बर 2019 में चीनी पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय ने घोषणा की कि 2005 की तुलना में 2020 में कार्बन उत्सर्जन 40 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक कम होने वाला लक्ष्य समय से पहले साकार हुआ। 

चीन में भूमि मरुस्थलीकरण नियंत्रण में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हुए हैं। साल 2019 में चीन ने मरुस्थलीकरण और रेतीलीकरण दोनों का क्षेत्रफल कम हो गया, जो समय से पहले संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तुत 2030 में विश्व में अवकृष्ट भूमि के शून्य विकास वाले लक्ष्य को बखूबी अंजाम दिया गया।

उपरोक्त उदाहरणों से चीन में पारिस्थितिकी सभ्यता के निर्माण में प्राप्त करिश्मा दिखाई देता है।

पिछले 15 सालों में चीन के विभिन्न गांव पारिस्थितिकी सभ्यता वाले विचार के मार्गदर्शन पर गरीबी उन्मूलन के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। देश भर में अनवरत विकास तरीके की खोज में सक्रिय है। हरित रोपण का विकास, ग्रामीण पर्यटन का विकास आदि हरित विकास रास्ता चुना गया। पर्यटन को लेकर उदाहरण दें, चीनी राष्ट्रीय वन और घास ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, 11 लाख पंजीकृत गरीब जनसंख्या में वन पर्यटन पर निर्भर होकर प्रति व्यक्ति को 3500 युआन की सालाना अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। 17 प्रतिशत से 20 प्रतिशत वाले गरीब जनसंख्या ने पर्यटन उद्योग के विकास से गरीबी को खत्म किया।  

“स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ अमूल्य संपत्ति हैं”। इस विचार के मार्गदर्शन पर चीन को आर्थिक विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण वाला नया विकास रास्ता मिल गया है। इसके साथ ही चीन ने वैश्विक पारिस्थितिकी सभ्यता के सह-निर्माण और मानव जाति के साझे भाग्य समुदाय की स्थापना को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )