China

कृषि योग्य भूमि को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है चीन

चीन एक कृषि प्रधान देश है और खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी भी। चीन न केवल एक अरब 40 करोड़ की विशाल आबादी की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी खाद्य उत्पादों का निर्यात करता है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में चीन में 657 मिलियन टन से अधिक अनाज उत्पादन हुआ। जबकि नए चीन की स्थापना के बाद 1949 में महज 113 मिलियन टन उत्पादन हुआ था। इस तरह चीन ने पिछले कुछ दशकों में खाद्यान्न उत्पादन के वैज्ञानिक तरीके अपनाकर उपज बढ़ाने में बड़ी प्रगति हासिल की है। हालांकि चीन में खेती योग्य भूमि का अवैध इस्तेमाल एक समस्या रही है। इसलिए उपजाऊ भूमि को बचाए रखने के लिए चीन लगातार कोशिश कर रहा है। भले ही चीन बहुत ज्यादा मात्रा में उत्पादन करता हो, लेकिन कृषि योग्य भूमि का ह्रास एक अहम मुद्दा है। इस बाबत चीन की संबंधित एजेंसियां सख्त कदम उठा रही हैं। 

चीन खेती के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध लगता है। चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के अनुसार खेती के अवैध उपयोग को रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इस संदर्भ में कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर मंत्रालय ने जुलाई में दो नोटिस जारी किए। इनमें अचल संपत्ति परियोजनाओं के लिए भूमि के अवैध उपयोग को प्रतिबंधित किया गया, साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण के लिए उचित भूमि उपयोग सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया गया। इसके अलावा सरकार की ओर से विभिन्न माध्यमों से खेती के कानूनी उपयोग के बारे में लोगों को जागरूक करने की कोशिश जारी है।

इतना ही नहीं सरकार द्वारा हाल के महीनों में निरीक्षण और कानून प्रवर्तन को मजबूत करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं, बताया जाता है कि जुलाई से नवंबर तक कई प्रांतों में अवैध खेती करने का कोई मामला सामने नहीं आया। 

यहां बता दें कि दस प्रांतों और 13 क्षेत्रों ने गैरकानूनी खेती के उपयोग को रोकने के लिए विशिष्ट योजना तैयार की है। इनमें युन्नान, आनह्वेई, फ़ुचियान, हुपेई आदि प्रांत और तिब्बत स्वायत्त प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। स्थायी खेती योग्य भूमि के अवैध इस्तेमाल, बिक्री व हस्तांतरण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

 
( लेखक अनिल पांडेय, पेइचिंग )


 


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