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एशिया-प्रशांत समुदाय का सहनिर्माण करें

20 नवम्बर को एपेक के 27वें अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में “एशिया-प्रशांत समुदाय का सहनिर्माण” इस लक्ष्य को प्राप्त किया गया और आगामी 20 साल में एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग के लिए दिशा निर्धारित की गयी है।

इस शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने फिर एक बार खुलेपन व समावेशी, नवाचार व विकास, आपसी संबंध व आपसी संपर्क, सहयोग व साझी जीत वाले एशिया-प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना करने की पहल पेश की।

एपेक के अधीनस्थ आर्थिक अनुसंधान संस्थान के अनुमान के मुताबिक कोरोनावायरस के झटके से इस साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पिछले 30 सालों में पहली बार आर्थिक विकास की नकारात्मक वृद्धि आयी है। पूर्व योजनानुसार पिछले 20 से अधिक सालों में एपेक आर्थिक सहयोग के बोगोर लक्ष्य की समय तिथि इस साल के अंत तक खत्म होगी। भविष्य में एशिया-प्रशांत सहयोग कैसा होगा? नया खांका बनाने की आवश्यक्ता है।

इस शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एशिया-प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय पर प्रकाश डाला, जो इस क्षेत्र में नये विजन को साकार करने के लिए रास्ता दिखाता है। एशिया-प्रशांत सहयोग के लिए स्वतंत्र व्यापार क्षेत्र का निर्माण अति ध्यानाजनक है। आरसीईपी पर हस्ताक्षर होने के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र व्यापार क्षेत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। 

शी चिनफिंग ने अपने भाषण में एशिया-प्रशांत स्वतंत्र व्यापार क्षेत्र का यथाशीघ्र ही निर्माण करने पर स्पष्ट दिया और कहा कि चीन ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए व्यापक और प्रगतिशील समझौते (टीपीटीपीपी) में हिस्सा लेने पर भी सोच विचार कर रहा है। 

नयी परिस्थिति में एशिया-प्रशांत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नयी प्रेरणा शक्ति की जरूरत है। एपेक इंटरनेट और डिजिटल अर्थव्यवस्था के रोड मैप का कार्यान्वयन करने से, डिजिटल व्यापारिक माहौल को श्रेष्ठ बनाने और अगले साल डिजिटल गरीबी उन्मूलन संगोष्ठी का आयोजन तक, चीन ने सिलसिलेवार सुझाव और कदम पेश किये हैं।

महामारी की स्थिति में चीन ने एशिया-प्रशांत के अनेक देशों के साथ ग्रीन चैनल खोले और विश्व उद्योग श्रृंखला और सप्लाई श्रृंखला की रक्षा करने की पूरी कोशिश की। अपने भाषण में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कार्गो के ग्रीन चैनल के निर्माण को आगे बढ़ाने और बेल्ट एंड रोड का सहनिर्माण करने की अपील की, ताकि एशिया-प्रशांत आर्थिक एकीकरण की नींव को मजबूत किया जा सके।  एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग कभी भी शून्य-जमा खेल नहीं है और जीतने और हारने का राजनीतिक खेल भी नहीं, जबकि वह आपसी लाभ और साझी जीत वाला विकास प्लेटफार्म है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)