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टिप्पणी:जनता के लिए करें, जनता पर निर्भर रहें, चीन का महामारी रोकने का संघर्ष

वुहान शहर में महामारी फैलने के सबसे गंभीर समय एक ही दिन 13 हजार नये रोगी पुष्ट हुए। जबकि आज वुहान शहर के अस्पतालों में नये कोरोनावायरस रोगियों की संख्या शून्य हो चुकी है। इस का मतलब है कि चीनी जनता ने कठोर संघर्ष के जरिये नये कोरोनावायरस महामारी की रोकथाम में उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की हैं।  
चीन में महामारी के खिलाफ लड़ने में भारी विजय जीतने का कारण यही है कि सब कुछ जनता के लिए है, और सब कुछ जनता पर निर्भर है। दुनिया में कम पार्टी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के जैसे जनता की सेवा को अपने चार्टर में शामिल करती है। महामारी फैलने के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी चिनफिंग ने कई बार जोर देते हुए कहा कि जनता के जान की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिये। इस विचार के जरिए चीनी समाज ने जल्दी महामारी के प्रकोप को रोकने का प्रयास शुरू किया। 
हूपेइ प्रांत का वुहान शहर चीन में महामारी फैलने का केंद्र रहा। इसलिए महामारी को रोकने की कुंजी वुहान शहर में ही है। शी चिनफिंग ने खुद भी वुहान शहर का दौरा किया और वहां महामारी रोकथाम कार्यों का नेतृत्व किया। चीन ने इतिहास में सब से सकारात्मक कदम उठाये। 23 जनवरी को 1.1 करोड़ जनसंख्या वाले बड़े शहर वुहान के सभी बाहर जाने वाले मार्गों को बन्द किया गया। जिससे महामारी के प्रसार को रोकने के लिए कुंजीभूत भूमिका अदा की गयी है। 6 मार्च को पत्रिका विज्ञान में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार चीन के इस कदम ने चीनी मुख्य भूमि में महामारी को 3 से 5 दिन की देरी की है। और फरवरी के मध्य तक अंतरराष्ट्रीय केस ट्रांसमिशन में लगभग 80% की कमी आई थी। केवल दसेक दिनों में वुहान में दो उच्च स्तरीय विशेष अस्पताल और अन्य अनेक वर्गाकार कक्ष अस्पताल भी निर्मित हुए। चालीस हजार से अधिक चिकित्सक देश के दूसरे क्षेत्रों में से वुहान गये। और साथ ही देश के दूसरे क्षेत्रों में महामारी की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाये गये। घर में चिकित्सा पृथक करने आदि के जरिये महामारी को रोकने में कारगर परिणाम निकला है। 
अभी तक वुहान शहर के अस्पतालों में नये कोरोनावायरस रोगियों की संख्या शून्य तक रही है। और यह भी चर्चा करने योग्य है कि वुहान में 2500 रोगियों, जिनकी उम्र 80 साल से ऊपर है, के इलाज की सफल दर 70 प्रतिशत तक रही। उन में 108 साल पुराने वाले एक बुजुर्ग भी शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक के उच्च स्तरीय सलाहकार ब्रूस एलबर्ड ने कहा कि तथ्यों से चीन का उपाय सफल साबित हुआ है। 
सिंगापुर विश्वविद्यालय के पूर्वी एशिया अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर जंग यूंग न्यैन ने कहा कि महामारी की रोकथाम में जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना यह चीन का प्रथम सिद्धांत है। और साथ ही महामारी की रोकथाम के साथ-साथ चीन सरकार ने जन जीवन की गारंटी के लिए भी जोरदार कदम उठाये हैं। महामारी के फैलाव में चीन में जल, बिजली, हीटिंग, कम्युनिकेशन, लिविंग सप्लाई की आपूर्ति और सामाजिक व्यवस्था सामान्य रूप से बनी रही जो एक चमत्कार माना जाता है। जैसे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने विदेशी नेताओं के साथ फोन पर बातचीत करते हुए यह कहा, "जनता ही हमें महामारी को हराने की शक्ति और आत्मविश्वास देती है। जनता ही असली वीर है।" ब्रिटेन के सोश्ल अकादमी के अकादमिशियन मार्टिन एलब्रो   ने कहा कि महामारी की रोकथाम में चीनी लोगों के सहयोग, कड़ी मेहनती, स्व-अनुशासित और अच्छी मानसिक स्थिति और चरित्र दर्शाया गया है। जिससे विश्व पर गहरी छाप पड़ी है।
महामारी के खिलाफ लड़ने में जीत हासिल करने के लिए एकता और सहयोग की जरूरत है। आज चीन महामारी के बादल में से निकल कर देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में काम कर रहा है। हमें विश्वास है कि इस साल के अंत तक खुशहाल समाज का लक्ष्य साकार किया जाएगा। "सब कुछ जनता के लिए ही है, सब कुछ जनता पर निर्भर है", यह चीन के लिए अनगिनत कठिनाइयों को दूर करने की कुंजी है, और चीन की अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की शक्ति भी है।
(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)