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पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस को स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी बढ़त

चंडीगढ़ः किसानों के विरोध के बीच, पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। वहीं भाजपा जो केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर गुस्से का सामना कर रही थी, का निराशाजनक प्रदर्शन देखने को मिला है। क्लीन स्वीप में, कांग्रेस ने अबोहर में 50 वार्डों में से 49 जीते, जबकि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने एक जीता। होशियारपुर के 50 वार्डों में से, कांग्रेस ने 31 वार्ड जीते। भारतीय जनता पार्टी ने 4 वार्ड जीते, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) ने दो जीते। हालांकि, शिअद और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कोई वार्ड नहीं जीता।

मोगा में कांग्रेस ने 50 वार्डों में से 20 जीते, जबकि शिअद 15 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 10 वार्ड जीते, जबकि आप और भाजपा ने क्रमश: 4 और एक वार्ड जीते। भवानीगढ़ नगरपालिका परिषद में, कांग्रेस ने 15 में से 13 सीटें जीतीं, जबकि शिअद और निर्दलीय ने एक-एक सीट जीती। भाजपा और आप किसी भी सीट को हासिल करने में विफल रहे। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि 116 शहरी स्थानीय निकायों के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना जारी है। बूथ कैप्चरिंग और झड़प के आरोपों के बीच, राज्य में 14 फरवरी को 39,15,280 मतदाताओं के साथ 71.39 प्रतिशत मतदान हुआ था।

मोहाली में अनियमितताओं की रिपोर्ट के कारण 2 बूथों में रिपोलिंग के बाद नगर निगम के लिए मतगणना गुरुवार को होगी। शहरी स्थानीय निकायों में मुख्य मुकाबला कांग्रेस, विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच है। विवादित केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर किसानों के विरोध का सामना कर रही भाजपा भी मैदान में है। यह अकालियों के बिना दो दशकों में पहली बार चुनाव लड़ रहा है, जो कि एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी हैं, जिन्होंने कृषि कानूनों को लेकर पार्टी से किनारा कर लिया। कस्बों और शहरों के स्थानीय मुद्दे भी चुनाव प्रचार के दौरान हावी रहे थे। 


7 नगर निगमों अबोहर, बठिंडा, बटाला, कपूरथला, होशियारपुर, पठानकोट और मोगा और 109 नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों के लिए मतगणना शुरू हुई। 2,302 वार्डों के लिए कुल 9,222 उम्मीदवार मैदान में थे। राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले ये चुनाव अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के लिए एक ‘सेमीफाइनल’ है,  जो कृषि कानूनों के खिलाफ लोगों की नाराजगी को अपनी भुनाने की कोशिश में है। 



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