American politicians

क्या अमेरिकी राजनीतिज्ञों को स्वच्छ साइबर पर चर्चा करने की पात्रता है

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 5 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने से स्वच्छ साइबर योजना की घोषणा की ,जिस का उद्देश्य चीनी साइबर कंपनियों का प्रभाव मिटाना है ।6 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी सोशल मीडिया कंपनियों पर बैन लगाने के प्रशासनिक आदेश पर हस्ताक्षर किये ।कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञ तकनीकी बैन से सूचना दुनिया में चीन को निकालना चाहते हैं ।उन की बदनीयत को व्यापक निंदा मिली ।

पोम्पियो की तथाकथित स्वच्छ साइबर योजना वास्तव में चीनी सूचना कंपनियों के खिलाफ राजनीतिक अत्याचार है ।तथ्यों से साबित हुआ है कि प्रतिबंधित चीनी कंपनियों की तकनीक और उत्पाद सुरक्षित और विश्वसनीय है ।उन को साइबर सुरक्षा घटना कभी नहीं हुई ।इस के विपरीत साइबर सुरक्षा जगत में अमेरिका का कुख्यात नाम है ।वर्ष 2013 में यह पर्दाफाश हुआ कि अमेरिका ने जर्मनी चांसलर मर्कल के निजी टेलीफोन पर दस से अधिक साल तक निगारी की ।वर्ष 2018में अमेरिका ने रूस पर साइबर हमला किया ,जिस से रूसी सरकारी न्यूज एजेंसी की साइबर कई दिन तक ठप्प हुई ।सितंबर 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने साइबर रणनीति पर हस्ताक्षर कर अमेरिकी सेना को प्रगतिशील साइबर हथियार तैनात करने और हमलावर साइबर काररवाई चलाने का अधिकार सौंपा ।तथ्यों से साबित है कि अमेरिका ही वैश्विक साइबर नेटवर्क की सुरक्षा का सब से बड़ा खतरा है ।

अमेरिका इसलिए चीनी सूचना कंपनियों को दबा रहा है कि वह हाई टेक क्षेत्र में अपने एकाधिकार की सुरक्षा करना और आम चुनाव के मद्देनजर कोविड-19 महामारी के मुकाबले में विफलता समेत घरेलू सवालों को ढकना चाहते हैं । 

इधर कुछ साल चीनी दूर संचार व्यवसायों का तेज विकास हुआ और 5 जी समेत तकनीकें और कुछ साइबर कंपनियां विश्व में अग्रसर रहती हैं ।दूसरी तरफ चीन का विशाल बाजार है ।पोम्पियो जैसे कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों की चीनी सूचना तकनीक कंपनियों का गम घोंटने की कुचेष्टा निश्चय ही हार जाएगी ।शायद अमेरिका विश्व से अलग हो सकता ,लेकिन चीन और समग्र विश्व को अलग करना नामुमुकिन है ।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)