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नेविगेशन की स्वतंत्रता पर दोहरा मापदंड मत अपनाएं

भारतीय मीडिया के अनुसार भारत और वियतनाम की नौसेनाओं ने 26 और 27 दिसंबर को दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री सैन्याभ्यास किया। भारतीय नौसेना ने कहा कि वर्तमान सैन्याभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग मजबूत कर क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में योगदान करना है। हाल में भारत ने क्रमशः दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर टिप्पणी की। भारत और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों ने कुछ समय पहले ऑनलाइन मुलाकात की। नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े व्यवहार मापदंड क्षेत्र के अन्य देशों या तीसरे पक्ष के हित को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। 

उन्होंने दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया। पिछले महीने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर पर भारत का रुख बताया था। भारत के लिए दक्षिण चीन सागर सचमुच एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक जलमार्ग है। भारत और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन व रूस के बीच व्यापार सब यहां से गुजरते हैं। लेकिन व्यापारी जहाज दक्षिण चीन सागर में बिलकुल स्वतंत्रता से आ-जा सकते हैं। भारत द्वारा प्रस्तुत तथाकथित नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका की मांग जैसी है, यानी कि अमेरिका के युद्धपोत स्वतंत्रता से दक्षिण चीन सागर में क्रूज कर सकते हैं। वहीं, हिंद महासागर में भारत द्वारा प्रस्तुत नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका से भिन्न है। अमेरिकी युद्धपोत अकसर भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, यहां तक कि भारत के प्रादेशिक बेइसलाइन के पास जाते हैं। इसका भारत विरोध करता है इसलिए नेविगेशन की स्वतंत्रता पर भारत दोहरा मापदंड अपनाता है। 

हाल के सालों में भारत ने वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण चीन सागर के आसपास देशों के साथ सैन्य सहयोग मजबूत किया और मलक्का जलडमरूमध्य के पास क्षेत्रों में सैन्य संस्थापनों का निर्माण भी किया। भारत का मुख्य उद्देश्य चीन से सावधान रहना है। इस साल भारत ने मालाबार संयुक्त नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया का निमंत्रण किया। इसके चलते अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत समुद्री सैन्य गठबंधन स्थापित किया गया। चार देशों की सुरक्षा वार्ता का लक्ष्य स्पष्ट है, वह है चीन। वास्तव में दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन ने कई बार अपना रुख बताया है। वर्तमान में दक्षिण चीन सागर की स्थिति स्थिर बनी रहती है। शांति, विकास और सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय देशों की समान इच्छा है। आशा है कि संबंधित देश क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई नहीं करेंगे। 

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)नेविगेशन की स्वतंत्रता पर दोहरा मापदंड मत अपनाए भारतीय मीडिया के अनुसार भारत और वियतनाम की नौसेनाओं ने 26 और 27 दिसंबर को दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री सैन्याभ्यास किया। भारतीय नौसेना ने कहा कि वर्तमान सैन्याभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग मजबूत कर क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में योगदान करना है। हाल में भारत ने क्रमशः दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर टिप्पणी की। भारत और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों ने कुछ समय पहले ऑनलाइन मुलाकात की। नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े व्यवहार मापदंड क्षेत्र के अन्य देशों या तीसरे पक्ष के हित को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया। 

पिछले महीने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर पर भारत का रुख बताया था। भारत के लिए दक्षिण चीन सागर सचमुच एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक जलमार्ग है। भारत और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन व रूस के बीच व्यापार सब यहां से गुजरते हैं। लेकिन व्यापारी जहाज दक्षिण चीन सागर में बिलकुल स्वतंत्रता से आ-जा सकते हैं। भारत द्वारा प्रस्तुत तथाकथित नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका की मांग जैसी है, यानी कि अमेरिका के युद्धपोत स्वतंत्रता से दक्षिण चीन सागर में क्रूज कर सकते हैं। वहीं, हिंद महासागर में भारत द्वारा प्रस्तुत नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका से भिन्न है। अमेरिकी युद्धपोत अकसर भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, यहां तक कि भारत के प्रादेशिक बेइसलाइन के पास जाते हैं। 

इसका भारत विरोध करता है इसलिए नेविगेशन की स्वतंत्रता पर भारत दोहरा मापदंड अपनाता है। हाल के सालों में भारत ने वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण चीन सागर के आसपास देशों के साथ सैन्य सहयोग मजबूत किया और मलक्का जलडमरूमध्य के पास क्षेत्रों में सैन्य संस्थापनों का निर्माण भी किया। भारत का मुख्य उद्देश्य चीन से सावधान रहना है। इस साल भारत ने मालाबार संयुक्त नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया का निमंत्रण किया। इसके चलते अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत समुद्री सैन्य गठबंधन स्थापित किया गया। चार देशों की सुरक्षा वार्ता का लक्ष्य स्पष्ट है, वह है चीन। 

वास्तव में दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन ने कई बार अपना रुख बताया है। वर्तमान में दक्षिण चीन सागर की स्थिति स्थिर बनी रहती है। शांति, विकास और सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय देशों की समान इच्छा है। आशा है कि संबंधित देश क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई नहीं करेंगे। (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)नेविगेशन की स्वतंत्रता पर दोहरा मापदंड मत अपनाए भारतीय मीडिया के अनुसार भारत और वियतनाम की नौसेनाओं ने 26 और 27 दिसंबर को दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री सैन्याभ्यास किया। 

भारतीय नौसेना ने कहा कि वर्तमान सैन्याभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग मजबूत कर क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में योगदान करना है। हाल में भारत ने क्रमशः दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर टिप्पणी की। भारत और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों ने कुछ समय पहले ऑनलाइन मुलाकात की। नरेंद्र मोदी ने कहा कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े व्यवहार मापदंड क्षेत्र के अन्य देशों या तीसरे पक्ष के हित को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर भी जोर दिया। पिछले महीने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर पर भारत का रुख बताया था। भारत के लिए दक्षिण चीन सागर सचमुच एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक जलमार्ग है। 

भारत और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन व रूस के बीच व्यापार सब यहां से गुजरते हैं। लेकिन व्यापारी जहाज दक्षिण चीन सागर में बिलकुल स्वतंत्रता से आ-जा सकते हैं। भारत द्वारा प्रस्तुत तथाकथित नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका की मांग जैसी है, यानी कि अमेरिका के युद्धपोत स्वतंत्रता से दक्षिण चीन सागर में क्रूज कर सकते हैं। वहीं, हिंद महासागर में भारत द्वारा प्रस्तुत नेविगेशन की स्वतंत्रता अमेरिका से भिन्न है। अमेरिकी युद्धपोत अकसर भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, यहां तक कि भारत के प्रादेशिक बेइसलाइन के पास जाते हैं। इसका भारत विरोध करता है इसलिए नेविगेशन की स्वतंत्रता पर भारत दोहरा मापदंड अपनाता है। 

हाल के सालों में भारत ने वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण चीन सागर के आसपास देशों के साथ सैन्य सहयोग मजबूत किया और मलक्का जलडमरूमध्य के पास क्षेत्रों में सैन्य संस्थापनों का निर्माण भी किया। भारत का मुख्य उद्देश्य चीन से सावधान रहना है। इस साल भारत ने मालाबार संयुक्त नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया का निमंत्रण किया। इसके चलते अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत समुद्री सैन्य गठबंधन स्थापित किया गया। चार देशों की सुरक्षा वार्ता का लक्ष्य स्पष्ट है, वह है चीन। वास्तव में दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन ने कई बार अपना रुख बताया है। वर्तमान में दक्षिण चीन सागर की स्थिति स्थिर बनी रहती है। शांति, विकास और सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय देशों की समान इच्छा है। आशा है कि संबंधित देश क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई नहीं करेंगे।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)



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