नेचुरल तरीके से अपने मधुमेह को कंट्रो

प्रेगनेंसी के दौरान दवाइयो की ज़गह इन नेचुरल तरीके से अपने मधुमेह को कंट्रोल करें महिलाएं

डायबिटीज मेलेटस, जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है, चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक रक्त में शर्करा का स्तर उच्च होता है। उच्च रक्त शर्करा के लक्षणों में अक्सर पेशाब आना होता है, प्यास की बढ़ोतरी होती है, और भूख में वृद्धि होती है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, मधुमेह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। तीव्र जटिलताओं में मधुमेह केटोएसिडोसिस, नॉनकेटोटिक हाइपरोस्मोलर कोमा, या मौत शामिल हो सकती है। गंभीर दीर्घकालिक जटिलताओं में हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी की विफलता, पैर अल्सर और आंखों को नुकसान शामिल है।

आजकल ये समस्या सभी में आम देखने को मिलती है। छोटे से लेकर बड़े सभी इस समस्या का शुक्र होता जा रहे है। लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चो और गर्भवती महिलाओ पर पड़ता है। लेकिन इस समय में अधिक मेडिसिन्स खाना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। आज हम आपके लिए कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे लेकर आए है जिससे आप नेचुरल तरीके से  डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते है। तो आइए जानते है :

प्रेगनेंसी में डायबिटीज के कारण क्या हैं?
प्रेगनेंसी में इंसुलिन सही तरीके से ना बन पाने के कारण शुगर स्तर बढ़ सकता है। यह एक ऐसा हार्मोन है, जो भोजन और ग्लूकोज को एनर्जी में बदलता है। इंसुलिन में गड़बड़ी के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी में डायबिटीज के कारण होने वाले जोखिम
. इससे शिशु का आकार समान्य से अधिक बड़ जाता है, जिससे सिजेरियन डिलिवरी की नौबत आ सकती है
. इससे शिशु को भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज होने का डर रहता है
. प्रेगनेंसी में डायबिटीज होने से प्रीमौच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है।
. जन्म के बाद शिशु को सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
. महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया (हाई बीवी से संबंधित स्थिति) का जोखिम रहता है।

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किन्हें अधिक खतरा
. 25 साल से अधिक उम्र में कंसीव करना
. फैमिली हिस्ट्री होना
. पहली बार डायबिटीज होने से अगली प्रेगनेंसी में इसकी आशंका बढ़ जाती है।
. प्रेग्नेंट महिला का वजन सामान्य से अधिक होना

प्रेगनेंसी में डायबिटीज होने पर क्या खाएं?

क्या खाएं?
1. महिलाएं डाइट में ऐसे फल शामिल करें, जिसमें शुगर की मात्रा कम हो जैसे संतरा, नींबू, आंवला, नाशपाती, अमरूद, अंजीर, मालटा, सिंघाड़ा आदि। आप रोज 100-150 ग्राम फल खा सकती हैं।

2. सब्जियों में आप करेला, बथुआ, साग, पालक, मेथी, तोरई, शिमला मिर्च, भिंडी, ब्रोकली, हरी बीन्स, गाजर, सीताफल, लहसुन, अदरक, प्याज आदि खा सकती हैं।

3. दिनभर में 4-5 कचोरी सब्जियों का सलाद खाएं। इसके अलावा भरपूर पानी, जूस, नारियल पानी पीएं। आप 1-2 कप ग्रीन टी भी ले सकती हैं।

फाइबर व ओमेगा-3 फैटी एसिड
ऐसी चीजें अधिक खाएं, जिसमें फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक हो क्योंकि इससे इंसुलिन का स्तर सही रहती है। इसके लिए आप ब्राउन व बिना पॉलिश चावल, चोकर मिला आटा, छिलके वाली दालें, राजमा, ब्राउन ब्रेड, ओट्स, दलिया, स्प्राउट्स, फिश आदि खा सकती हैं।

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कार्बोहाइड्रेट डाइट
कार्बोहाइड्रेट डाइट भी प्रेगनेंसी में फायदेमंद होती है क्योंकि इससे शरीर में धीरे-धीरे और कम मात्रा में शुगर का निर्माण होता है। प्रेगनेंसी में रोजाना 10-12 हेल्दी कार्बोहाइड्रेट की सर्विंग काफी है। इसके लिए आप होल ग्रेन पास्ता, ब्राउन राइस, होल ग्रेन ब्रेड, ओटमील, आलू, होल ग्रेन्स, केले, फूल गोभी, पालक, ब्रोकोली, शतावरी, स्वीट कॉर्न, दूध, दही, फलियां, राजमा, दालें खा सकती हैं।

घी-तेल
प्रेगनेंसी में रोजाना 2 चम्मच देसी घी जरूर लें। इसके अलावा खाना पकाने के लिए सोयाबीन, सरसों, अलसी, सूरजमुखी तेलों का यूज करें। मगर, ध्यान रखें कि दिनभर में 15-20 ग्राम से ज्यादा फैट ना लें।

खाएं दूध से बनी चीजें
लौ फैट दूध, दही, पनीर का सेवन भी प्रेगनेंसी में फायदेमंद होता है। आप चाहें तो नमकीन लस्सी या छाछ भी पी सकती हैं।

फास्‍ट फूड व कोल्ड ड्रिंक से परहेज
फास्ट फूज्स, मसालेदार भोजन और खासकर कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाकर रखें। जंक फूड में स्‍टार्च तो कोल्ड ड्रिंक में आर्टिफिशियल शुगर होती है, जिससे इंसुलिन का स्तर भी बिगड़ सकता है।

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इन बातों का भी रखें ध्यान
. इस दौरान किसी भी तरह का स्ट्रेस ना लें और पूरा आराम करें। ज्यादा से ज्यादा अच्‍छे कामों में समय बिताएं।
. वजन को 10 से 11 कि.लो. से ज्यादा ना बढ़ने दें।
. हल्की-फुल्की सैर, एक्सरसाइज या योग करती रहें।

इसके अलावा रेग्लूर जांच करवाएं, जिसमें डायबिटीज टेस्ट भी शामिल हो। साथ ही डॉक्‍टर की बताई सभी दवाएं, एक्‍सरसाइज और परहेज को फॉलो करें।