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चीन में पर्यावरण प्रशासन और हरित विकास के अनुभव विश्व के लिए सीखने योग्य हैं

इधर के वर्षों में चीन ने पारिस्थितिकी सभ्यता की विचारधारा से विकास का मार्गदर्शन किया, पारिस्थितिकी सभ्यता के निर्माण को प्राथमिकता दी और मानव जाति और प्रकृति के सामन्जस्यपूर्ण सहअस्तित्व के आधुनिकीकरण का निर्माण करने की कोशिश की। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र में चीन के योगदान का उच्च मूल्यांकन किया। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी माना कि हरित विकास को आगे बढ़ाने और पारिस्थितिकी सभ्यता का निर्माण करने के चीनी अनुभव ने विश्व को अहम योगदान दिया है और ये अनुभव विश्व के विभिन्न देशों के लिए सीखने योग्य हैं।

इधर के वर्षों में चीन में तीन उत्तरी रक्षात्मक वन पट्टी परियोजना यूएनईपी द्वारा विश्व रेगिस्तान पारिस्थितिकी अर्थतंत्र का मॉडल क्षेत्र है। सेहाईबा वन्य के निर्माता आदि ने क्रमशः यूएन पर्यावरण संरक्षण का सबसे ऊँचा इनाम पृथ्वी रक्षक पुरस्कार जीता है। 

यूएनईपी की कार्यकारिणी प्रभारी इंगर एंडर्सन ने कहा कि दो दशक पहले चीन के अनेक रेगिस्तान क्षेत्र अब हरे मैदान में बदल रहे हैं। 2009 से 2019 के बीच चीन ने कुल 7.039 करोड़ हेक्टर वन्य क्षेत्रों का निर्माण किया। बीते तीन सालों में चीन में करीब 50 करोड़ लोग अलीपेई के एन्ट्स जंगल के जरिए 12.2 करोड़ पेड़ उगाये हैं और कार्बन की निकासी को 79.2 लाख टन को कम किया। चीन में पेड़ उगाने और रेगिस्तान का निपटारा करने के अनुभवों को यूएन के संबंधित घोषणा पत्र में भी लिखा गया है। चीनी विशेषज्ञों को नाइजीरिया और मोरोगो आदि देशों में रेगिस्तान का निपटारा करने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। अब चीन की भूमि और हरित हो गयी और आसमान और नीला हो गया है। 

चीनी पारिस्थितिकी पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इधर के वर्षों में चीन के अनेक प्रमुख शहरों में पीएम 2.5 घनत्व में कटौती की गयी है। यूएनईपी की उप कार्यकारिणी प्रभारी जोर्से म्सुया ने कहा कि चीन ने नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण की विचारधारा शिक्षित की है और चीन ने पर्यावरण संरक्षण कार्य की निगरानी के लिए अनेक ठोस कदम उठाये हैं। साथ ही चीन ने कुछ विनिर्माण उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा देने का समर्थन किया और तदनुरुप नीतियां भी पेश की हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रशासन में चीन के उपरोक्त अनुभव बाकी देशों के लिए सीखने योग्य है।
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप)