Tedros

टेड्रोस की परेशानी का हल कैसे किया जाएगा

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने हाल में जानकारी दी कि विश्व के 49 समृद्ध देशों के लोगों को 3.9 करोड़ से अधिक वैक्सीन लगायी गयी है, जबकि कुछ अविकसित देशों के पास केवल 25 वैक्सीन हैं। अनेक मीडिया ने कहा कि गिन्नी में केवल राष्ट्रपति सहित 25 लोगों को वैक्सीन लगायी गयी है।

2.5 करोड़ नहीं, 25 हजार नहीं, जबकि 25 ही है! मैं कहना चाहता हूं कि दुनिया आपदा के किनारे पर खड़ी है।टेड्रोस की परेशानी पूरी दुनिया की परेशानी भी है।

वैक्सीन के वितरण को और न्यायपूर्ण बनाना, विभिन्न देशों के प्रमुख समूहों को वैक्सीन लगाना, निम्न आमदनी वाले देशों के लोगों को भी वैक्सीन देना डब्ल्यूएचओ आदि संस्थाओं द्वारा शुरू की गयी कोविड-19 टीका कार्यान्वयन योजना कोवेक्स का मकसद है। लेकिन लोगों ने देखा कि कुछ पश्चिमी देशों ने बड़े पैमाने पर वैक्सीन को अपने पास रखने की पूरी कोशिश की। कुछ पश्चिमी वैक्सीन निर्माताओं ने भी कोवेक्स को नजरअंदाज कर सर्वप्रथम समृद्ध देशों को वैक्सीन प्रदान किया और दामों को ऊँचा बनाया, जिससे वैक्सीन बाजार में अराजकता आ रही है। डब्ल्यूएचओ की वैक्सीन खरीदारी प्रक्रिया में बाधा आयी है।

विश्व महामारी के सामने मानव जाति को एकता और सहयोग से इसका निपटारा करना चाहिए। इस क्षेत्र में चीन हमेशा कार्रवाई करता रहा है।

हाल में चिली, संयुक्त अरब अमीरात, बर्लिन, जोर्डन, मिस्र, तुर्की, इंडोनेशिया, ब्राजिल आदि देशों ने चीनी वैक्सीन का प्रयोग करने को अनुमति दी है। अपूर्ण आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 40 से अधिक देशों ने चीन से वैक्सीन आयात करने की मांग पेश की। विश्व के अनेक देशों के नेताओं को भी चीनी वैक्सीन लगायी जा चुकी है।

चीन के प्रयास ने बड़े हद तक विकासमान देशों में वैक्सीन के प्रयोग को उन्नत किया और विश्व वैक्सीन के न्यायपूर्ण वितरण को प्रबल रूप से आगे भी बढ़ाया है। विश्व के विभिन्न देशों को चीनी एक्शन जैसी कार्रवाइयां करनी चाहिए और हाथ मिलाकर महामारी का मुकाबला करना चाहिए। यही है टेड्रोस की परेशानी में शैथिल्य लाने वाली उपयोगी दवा ही है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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