American racism

कैसे निकलेगा अमेरिकी नस्लवाद का हल ?

पिछले साल हुई अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की हत्या के प्रकरण में अमेरिकी पुलिस अधिकारी की जूरी द्वारा जल्द ही सुनवाई की जाएगी। हालांकि इस घटना के बाद पूरे अमेरिका में व्यापक प्रदर्शन हुए। लेकिन अमेरिकी लोग अभी भी नस्लवाद का सामना कर रहे हैं।आजकल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 46वीं बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समस्या के विशेष रिपोर्टर और विद्वानों ने संयुक्त रूप से वक्तव्य जारी कर अमेरिका सरकार से व्यापक सुधार के कदम उठाकर पुलिसकर्मियों की हिंसक कार्रवाई रोकने और नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव की समस्या का हल करने की अपील की।

अमेरिका में नस्लीय भेदभाव हो या श्वेत वर्चस्व, गुलाम व्यवस्था की समाप्ति के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी राजनेता नस्लवाद के मनमाने रूप से फैलने के सहायक बन चुके हैं। खास तौर पर भूतपूर्व अमेरिका सरकार ने कोविड-19 को बार-बार चीनी वायरस बताया और चीन को बदनाम करने की पूरी कोशिश की, जिससे एशियाई मूल के लोगों के प्रति पूर्वाग्रह और भेदभाव पैदा हुआ। अमेरिकी राजनेता केवल अपनी राजनीति और वोटों का ध्यान रखते हैं, और सच्चे माइने में नस्लवाद की समस्या का हल नहीं करना चाहते। और तो और उन्होंने मानवाधिकार का झंडा उठाकर दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में खुलेआम हस्तक्षेप किया। यदि अमेरिका सरकार यथार्थ कार्रवाई नहीं करती, तो 50 साल पहले मार्टिन लुथर किंग का कहा गया यह वाक्य“मेरा एक सपना है”अंत में सिर्फ सपना ही रह जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)




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