Himachal

कोविड काल में हिमाचल में प्रभावित हुआ निवेश

कोविड काल में हिमाचल में निवेश प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें सीमित होने के साथ साथ कोरोना संक्रमण के खौफ के चलते प्रभावित लोगों की आवाजाही की वजह से निवेश के प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर रहे । निवेश के धरातल पर न उतरने की वजह से प्रदेश में बेरोजगारी की दर बढ़ कर 12 फीसदी हो गई है। सीएमआईई के ताजा सर्वेक्षण में बेरोजगारी की दर में बढ़ोतरी का खुलासा हुआ है। निवेश बढ़ाने को लेकर सरकार ने अधिकारियों को धर्मशाला में आयोजित वैश्विक निवेशक महासम्मेलन में हुए एमओयू पर तेजी से काम करने को कहा है। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने बीते दिनों सचिवालय में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में अधिकारियों को ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में भाग लेने वाली कंपनियों के साथ रास्ता कायम करने के निर्देश देने की बात कही थी। उद्योग मंत्री का कहना था कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में भाग लेने वाली कुछेक कंपनियों ने धरातल पर काम भी शुरू कर दिया है।

हिमाचल में निवेश बढ़ा कर युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर जयराम सरकार काम कर रही है। योजना के तहत सरकार ने करीब एक साल पहले नवंबर 2019 में धर्मशाला में वैश्विक निवेशक महासम्मेलन का आयोजन किया। करीब 96 हजार करोड़ के एमओयू पर सम्मेलन में हस्ताक्षर हुए। इसके बाद करीब 14 हजार करोड़ की पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुई। मगर इससे पहले कि निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर पाते मार्च माह में कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू हुआ। इसका सीधा असर हिमाचल में निवेश पर पड़ा है। निवेश प्रभावित होने से बेरोजगारी बढने लगी है। सीएमआईई के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में बेरोजगारी की दर 12 फीसदी है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 8 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार हैं। राजनीतिक दलों के नेता बेरोजगारों की संख्या को 12 लाख के करीब बता रहे हैं। निवेश प्रभावित होने से न सिर्फ बेरोजगारी बढ़ी है, बल्कि औद्योगिक उत्पादन व कारोबार प्रभावित होने का असर भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।