union territory, Jammu and Kashmir

केंद्र शासित प्रदेश बनने के एक साल में कई मायनों में बदला गया जम्मू- कश्मीर

जम्मू-कश्मीर : राज्य पुनर्गठन कानून लागू होने के एक साल के भीतर जम्मू-कश्मीर में विभिन्न स्तरों पर कई बदलाव हुए हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सामरिक ही नहीं प्रशासनिक मोर्चे को मजबूती मिली है। प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने के साथ भ्रष्टाचार पर भी नकेल कस दी गई है। निजाम बदलने के साथ एक साल के दौरान जम्मू-कश्मीर में 86 कानून खत्म हो गए हैं। केंद्र के कानून लागू हुए हैं। प्रदेश में पंद्रह साल रहने वालों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी नागरिक बनने का हक देने और भूमि स्वामित्व कानून में बदलाव कर पूरे देश के लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर के द्वार खोल दिए गए हैं। सामाजिक और आर्थिक ही नहीं परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर राजनीतिक स्तर पर भी संतुलन साधने की कोशिश धरातल पर दिख रही है। 

इसी बीच, त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू करने के लिए नियमों में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर में पहली बार जिला विकास परिषद के गठन का रास्ता साफ कर दिया गया है। कोरोना संकट के बीच इस अरसे के दौरान प्रदेश में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। एलजी के सीधे नियंत्रण में एसीबी के आ जाने से भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई हो रही है। सीबीआई ने भी अब सीधे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करना शुरू कर दिया। कई बड़े अधिकारियों पर केस दर्ज हो चुके हैं। नए भूमि कानून से नए उद्योगों का रास्ता भी साफ हो गया है।