Jammu and Kashmir

जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग को मिला एक और साल, विधानसभा चुनाव की ओर ये संकेत

जम्मू-कश्मीर में संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की सीमाएं पुर्निनर्धारित करने के लिए बनाए गए पैनल ‘परिसीमन आयोग’ की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है और यह इस बात का संकेत है कि केंद्रशासित प्रदेश में जल्द विधानसभा चुनाव नहीं होंगे।
सरकार ने बुधवार रात को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में जानकारी दी कि उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाले पैनल को केंद्रशासित प्रदेश में अपना काम पूरा करने के लिए एक और साल मिलेगा। केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और इसके पुनर्गठन की घोषणा की थी, जिसके बाद यह केंद्रशासित प्रदेश अक्टूबर, 2019 में अस्तित्व में आया। 
 
जम्मू-कश्मीर और चार पूर्वोत्तर राज्यों--असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने के लिए इस पैनल का पिछले साल गठन किया गया था, हालांकि एक साल का अतिरिक्त समय केवल जम्मू-कश्मीर के लिए दिया गया है। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के पांच सांसद इस आयोग के पदेन सदस्य हैं। आयोग की कार्यवाहियों का नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) ने बहिष्कार किया है। संसद में अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित किया गया था। उससे पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सीटें थीं, जिन पर चुनाव लड़ा जाता था और इनमें से चार सीटें लद्दाख की थीं,जो अब अलग केंद्रशासित प्रदेश हैं। 
 
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 की धारा 60 के अनुसार, ‘‘जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 की जाएगी।’’ 24 सीटें पीओके में पड़ती है, इसलिए जिन सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा, उनकी संख्या 83 से बढक़र 90 हो जाएगी। केंद्रशासित प्रदेश में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव होंगे।



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