Makar Sankranti

पंजाब- नेपाल से लेकर देश के अलग-अलग भागों में ऐसे मनाई जाती है 'मकर संक्रांति', जाने महत्व

पूरे देश में आज 'मकर संक्रांति' का पर्व क्षद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। यह खास पर्व अलग-अलग देशों में अलग रीति रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। तो आज हम आपको बताएंगे उन देशों के बारे में खास जहां हर्षोल्‍लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है। 

हर‍ियाणा- पंजाब 

हरियाणा- पंजाब में यह पर्व 14 जनवरी से एक दिन पूर्व मनाया जाता है। बता दें कि इस यहां ‘लोहड़ी’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने मक्‍के की उसमें आहुत‍ि दी जाती है। इसके अलावा यह पर्व नई-नवेली दुल्‍हन और नवजात बच्‍चों के लिए बेहद खास होता है। 


बंगाल की मकर संक्रांति

शायद आप में से कम लोग ही इस बात से वाकिफ होंगे कि बंगाल में मकर संक्रांति के पर्व पर गंगासागर पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस पर्व के दिन स्‍नान के बाद तिल दान करने की परंपरा है। कहा जाता है कि इसी दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्‍ण की प्राप्ति के लिए उपवास रखा था। इसके अलावा मां गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जा मिली थी। जिस कारण हर साल मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। 


ब‍िहार की मकर संक्रांत‍ि 

इसके अलावा बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। यहां उड़द की दाल, चावल, तिल, खटाई और ऊनी वस्‍त्र दान करने की परंपरा है। 

असम- तमिलनाडु 

वहीं असम में इसे ‘माघ- बिहू’ और ‘ भोगाली-बिहू’ के नाम से जाना जाता है। वहीं तमिलनाडु में तो इस पर्व को 4 दिन तक मनाया जाता है। यहा पहला दिन ‘ भोगी – पोंगल, दूसरा दिन सूर्य- पोंगल, तीसरा दिन ‘मट्टू- पोंगल’ और चौथा दिन ‘ कन्‍या- पोंगल’ के रूप में मनाते हैं। 

राजस्‍थान- महाराष्‍ट्र

राजस्‍थान में 'मकर संक्रांति' के खास पर्व पर बहुएं अपनी सास को मिठाइयां और फल देकर उनसे आशीर्वाद लेती हैं। इसके अलावा किसी सौभाग्‍य की वस्‍तु को 14 की संख्‍या में दान करने का महत्‍व बताया गया है।

वहीं इस दिन महाराष्‍ट्र में लोग एक-दूसरे को तिल-गुड़ देते हैं और कहते हैं -तिल-गुड घ्या अणि गोड गोड बोलै। यानी तिल गुड़ खाओ और मीठा-मीठा बोलो। इसके अलावा इस दिन गूल नामक हलवे को बांटने की भी प्रथा है।

नेपाल

इस दिन को नेपाल में बेहद खास तरीके से मनाया जाता है। बताते चलें कि इस दिन  श्रद्धालु अच्‍छी फसल के लिए ईश्‍वर को धन्‍यवाद देते हैं और प्रार्थना करते हैं कि सभी पर उनकी कृपा हमेशा बनीं रहे। नेपाल में इस पर्व को ‘फसल का त्‍योहार’ या फिर ‘किसानों के त्‍योहार’ के रूप मनाया जाता है। 

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