माता सीता का पता

जानिए किसने बताया था हनुमान जी को माता सीता का पता

जटायु एक गरुड़ पक्षी थे. जब रावण माता सीता को ले जा रहा था, तो वे रावण से मुक्त होने के लिए संघर्ष कर रहीं थीं. जटायु ने जब ये देखा तो वे रावण को रोकने के लिए युद्ध करने लगे. माता सीता को बचाने के लिए जटायु ने शक्तिशाली रावण पर हमला बोल दिया, लेकिन शक्तिशाली रावण ने जटायु के पंख काट दिये जिससे जमीन पर आ गिरे और अपने प्राण त्याग दिए. प्राण त्यागने से पूर्व सीता जी की तलाश में घुम रहे भगवान राम और लक्ष्मण को रावण के बारे में बताया कि वही माता सीता को ले गया है.

गरुड़ कौन थे
पौराणिक कथा के अनुसार जटायु के भाई भी थे जिनका नाम संपाती था. ये दोनों अरुण नाम के देवपक्षी की संतान थे. वहीं अरुण प्रजापति कश्यप की संतान थे. अरुण का भी एक भाई थे जिन्हें गुरुड़ कहा जाता है. गरुड़ ही भगवान विष्णु के वाहन हैं और अरुण सूर्यदेव के सारथी बन गए.

संपाती ने बताया माता सीता का पता
जटायु की मृत्यु के बाद भगवान राम के सभी सहयोगी माता सीता की तलाश में जुट गए. हनुमान, जांबवंत, अंगद, सुग्रीव आदि दक्षिण दिशा में माता की सीता खोच कर रहे थे, जहां इनकी मुलाकात जटायु के भाई संपाती से हुई. हनुमान जी ने संपाती को पूरी घटना की जानकारी दी और ये भी बताया कि किस तरह से उनके भाई जटायु को रावण ने मार दिया. यह खबर सुनकर संपाती को बहुत दुख हुआ और फिर संपाती ने अपनी नजरों को घुमाना आरंभ किया संपाती की नजरें बहुत तेज थीं और बहुत दूर तक का साफ साफ देखने की क्षमता रखती थीं. संपाती ने हनुमानजी और जांबवंत को बताया कि रावण माता सीता को लंका ले गया है. हनुमान जी ने यह समाचार तुरंत भगवान राम को दिया. इसके बाद लंका पर चढ़ाई की तैयारी आरंभ हुई और अंत में रावण मारा गया.