New budget, Tarun Chugh

नया बजट भारत में विकास का एक नया युग : तरुण चुघ

जम्मू : दुनिया ने अतीत में कई संकट देखे हैं। विश्व युद्धों, 1973-1974 के तेल संकट, शीत युद्ध, 2008 में वैश्विक आर्थिक मंदी के शुरु आती 90 के दशक से कई संकट देखे गए हैं, लेकिन एक साल पहले दुनिया में जो असाधारण स्वास्थ्य संकट देखा गया, उसने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, राजनीतिक परिणामों, आर्थिक परिणामों और सामाजिक-सांस्कृतिक फैसलों के संदर्भ में पृथ्वी के चेहरे पर सरकार के हर सेट को चुनौती दी। मानव जीवन को आर्थिक गतिविधियों के लिए सर्वोपरि रखते हुए भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एन.डी.ए. सरकार की अगुवाई में वित्तीय वर्ष 2021-2022 के लिए एक दूरदर्शी बजट पेश किया, जिसे पिछले 100 वर्षो का सर्वश्रेष्ठ बजट कहा जा सकता है। एक स्वस्थ भारत की आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य होना, जो बदले में अर्थव्यवस्था को चलाएगा और एक लचीला और मजबूत राष्ट्र का निर्माण करेगा। सरकार ने स्वास्थ्य और कल्याण के लिए 2,23,846 करोड़ के परिव्यय का प्रस्ताव रखा, जोकि पिछले वर्ष से 137 प्रतिशत की वृद्धि है। सरकार ने आने वाले वित्त वर्ष में कोविड-19 वैक्सीन के लिए 35,000 करोड़ रुपए रखे, जिसमें भारत को कोविड-19 मुक्त बनाने के लिए और अधिक उपयोग करने के आश्वासन के साथ इसक भी प्रस्ताव रखा गया। समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा करने के उद्देश्य से सरकार एक नई केन्द्र प्रायोजित योजना, पी.एम. आत्मनिर्भर, स्वच्छ भारत योजना के साथ आई, जिसे लगभग 64,180 करोड़ 6 साल से अधिक की अवधि के परिव्यय के साथ लांच किया जाएगा। यह प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता विकिसत करेगा, मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत करेगा और नए और उभरते रोगों का पता लगाने और इलाज के लिए नए संस्थानों का निर्माण करेगा। घरों के कंधों पर अतिरिक्त बोझ का मुकाबला किया जाएगा और वे अनावश्यक चिकित्सा व्यय से जूझने के बजाए फलदायी निवेश में धन का उपयोग करने में सक्षम होंगे, जिससे बाजार में धन के नियमति संचलन में योगदान होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके धन में वृद्धि होती है भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि के साथ। पी.एम. नरेन्द्र मोदी की सरकार ने राजकोषीय बजट के माध्यम से 17,788 ग्रामीण और 11,024 शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्रों को समर्थन देने का आश्वासन दिया और सभी जिलों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना करने जा रही है और 11 राज्यों में 3382 सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों स्थापित भी। 602 जिलों और 12 के न्द्रीय संस्थानों में क्रि टिकल केयर अस्पताल ब्लॉकों की स्थापना। सरकार का एकमात्र उद्देश्य नागरिकों को उनके दरवाजे पर स्वास्थ्य सुविधाओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदान करना है। उन्हें मेट्रो शहरों में अस्पताल में भर्ती करते समय चिंताओं से मुक्त करना है, जिसमें न केवल चिकित्सा व्यय शामिल है, बल्कि यात्र की लागत भी शामिल है एक जगह से दूसरी जगह वे इलाज करवा सकें। समय पर पता लगाने, रोकथाम और चिकित्सा उपायों को खोजने के लिए उभरती बीमारियों की जांच करने के उद्देश्य से सरकार, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र को मजबूत कर रही है, जो देशव्यापी बीमारी की निगरानी करता है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों का आकलन करता है। पी.एम. नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में दूरदर्शी सरकार अपने प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए 5 क्षेत्रीय शाखाओं और 20 महानगरीय स्वास्थ्य निगरानी इकाइयों को मजबूत कर रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र 2021-2022 के बजट में प्रमुख है। स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ, सरकार ने चीन जैसी विस्तारवादी व्यवस्थाओं से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। 



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