UN General Assembly

26 देशों की ओर से चीन ने यूएन महासभा में मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए अमेरिका व पश्चिमी देशों की आलोचना की

5 अक्तूबर को आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की सामान्य बहस में चीन के स्थायी प्रतिनिधि च्यांग च्युन ने चीन, रूस, बेलारूस, कंबोडिया, अंगोला, क्यूबा, ​​फिलिस्तीन, और वेनेजुएला सहित 26 देशों की ओर से अमेरिका और पश्चिमी देशों की मानवाधिकारों के उल्लंघन की आलोचना की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एकतरफा जबरदस्ती के उपायों को तुरंत और पूरी तरह से हटा दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रणालीगत नस्लीय भेदभाव के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की।

  च्यांग च्युन ने कहा, कोविड-19 महामारी का सभी देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों पर गंभीर प्रभाव जारी है। महामारी के मुकाबले में वैश्विक एकजुटता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। लेकिन, एकतरफा जबरदस्ती के उपायों का कार्यान्वयन संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल मानदंड व सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह मानवाधिकारों पर एक निर्विवाद प्रभाव डालता है और साथ ही सामाजिक व आर्थिक विकास की पूर्ण प्राप्ति में बाधा डालता है।

च्यांग च्युन ने कहा कि डरबन डिक्लेरेशन के अपनाने के करीब 20 साल बाद भी कमजोर समूह नस्लीय भेदभाव और पुलिस की हिंसा से पीड़ित हैं और यहां तक ​​कि उनकी मौत भी हो रही है। हम मानवाधिकार परिषद से संबंधित प्रस्ताव पारित करने और इसे पूरी तरह से लागू करने का आह्वान करते हैं।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)