Once again the TV umpire

एक बार फिर TV umpire का निर्णय विवादों के घेरे में, Stokes के कैच को लेकर खिलाड़ियों ने नाखुशी की जाहिर

नई दिल्ली, भारत और इंग्लैंड के बीच नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट में टीवी अंपायर का निर्णय एक बार फिर से विवादों में आ गया। इसके पहले चेन्नई में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी टीवी अंपायर के कई निर्णय पर विवाद हुआ था। भारतीय पारी के दूसरे ओवर में फील्ड अंपायर अनिल चौधरी ने शुभमन गिल को सॉफ्ट सिग्नल के तहत आउट दिया, लेकिन टीवी अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद फील्ड अंपायर के फैसले को पलट दिया। हालांकि टीवी अंपायर सी शम्सुद्दीन ने एक ही ओर के फ्रेम को देखकर अपना निर्णय दे लिया. लेकिन सॉफ्ट सिग्नल के नियम के अनुसार फील्ड अंपायर के निर्णय को पलटने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए। टीवी अंपायर के फैसले के बाद इंग्लैंड टीम के कप्तान जो रूट सहित सभी खिलाड़ियों ने नाखुशी जाहिर की। भारतीय पारी के दूसरे ओवर में ब्रॉड की चौथी गेंद पर गिल का कैच स्लिप में स्टोक्स ने पकड़ा। 

अंपायर ने इसे आउट दिया क्योंकि वे पूरी तरस से सुनिश्चित नहीं थे कि स्टोक्स ने गेंद को सही से पकड़ा है या नहीं। इसके बाद फील्ड अंपायर ने अंतिम निर्णय के लिए टीवी अंपायर का सहारा लिया। टीवी रिप्ले में साफ दिखा रहा था कि स्टोक्स ने जब गेंद पकड़ी थी जब उनके हाथ गेंद के नीचे नहीं थे, लेकिन नियम के अनुसार टीवी अंपायर को अलग-अलग एंगल से इसे देखना चाहिए था। इसके पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के माइकल स्लेटर ने भी राहुल द्रविड़ के कैच को लेकर टीवी अंपायर के फैसले पर नाखुशी जाहिर की थी। मैच के दाैरान कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा है कि उनके पास ठोस सबूत नहीं हैं कि उन्होंने कैच ठीक से पकड़ा है। 

अगर कोई बहस करना चाहता है तो वह बाद में आकर मुझसे मिल सकता है। हालांकि पूर्व भारतीय खिलाड़ी संजय मांजरेकर ने टीवी अंपायर के जल्द फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीवी अंपायर ने निर्णय देने में तेजी दिखाई। हालांकि निर्णय सही था, लेकिन खिलाड़ियों की तरह डीआरएस के लिए समय की समय-सीमा होती है, अंपायर के लिए समय मायने नहीं रखता है। ऐसे में उन्हें समय लेना चाहिए था।



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