China

शांति और विकास को चीन और भारत की समान खोज होनी चाहिए

चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की 10वीं बैठक 20 फरवरी को मोल्दो-चुशुल सीमा बैठक के चीनी पक्ष में आयोजित की गई। दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के सुचारु रूप विघटन का सकारात्मक मूल्यांकन किया और माना कि यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिसने चीन-भारत सीमा के पश्चिमी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी क्षेत्र में अन्य शेष मुद्दें के समाधान के लिए एक आधार प्रदान किया है। बता दें कि पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन और भारत के अग्रिम पंक्ति के सैनिक 10 फरवरी से एक साथ योजनानुबद्ध और संगठनात्मक विघटन करने लगे। वर्तमान में संबंधित प्रक्रिया सुचारु रूप से की जा रही है।  

वास्तव में चीन सबसे अधिक थलीय पड़ोसियों और दुनिया में सबसे जटिल सीमा मुद्दों वाले देशों में से एक है। 1960 के दशक के बाद से चीन ने क्रमशः म्यांमार, नेपाल, मंगोलिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उत्तर कोरिया, रूस आदि देशों के साथ वार्ता के माध्यम से सीमा संधियों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए और सीमाओं का सीमांकन किया। इससे पता चलता है कि संघर्ष या युद्ध देशों के बीच सीमा के मुद्दों को हल करने का एकमात्र तरीका नहीं है। चीन और भारत दोनों लंबे इतिहास और सभ्यता वाले देश हैं। दोनों के पास बुद्धि है, जो सीमा मुद्दे को हल करने के लिए एक शांतिपूर्ण तरीका प्राप्त किया जा सकेगा। 

वर्तमान में, कुछ पश्चिमी देश दूसरों को युद्ध छेड़ने के लिए उकसाकर और प्रोत्साहित करके अपने स्वयं के राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही, वे "चार-पक्षीय सुरक्षा संवाद" और "इंडो-पैसिफिक रणनीति" की आड़ में अपनी राजनीतिक योजनाओं को साकार करने के लिए अन्य देशों को अपने ही रथों में बांधने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, चीन और भारत अपने-अपने राष्ट्रीय कायाकल्प के महत्वपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं। उनके पास समान विकास लक्ष्य, समान विकास अवधारणाएँ और विकास रणनीतियाँ हैं। शांति और विकास को चीन और भारत की समान खोज होनी चाहिए

इस वर्ष भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का अध्यक्ष देश है। 22 फरवरी को, चीन और भारत के बीच सीमा विवाद से ब्रिक्स सहयोग प्रभावित होगा कि नहीं, इस बारे में बात करते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वनपिन ने कहा कि चीन इस वर्ष के ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी में भारत का समर्थन करता है और भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में संचार और सहयोग मजबूत करना चाहता है, अर्थशास्त्र, राजनीति व मानविकी के तीन-पहिया संचालित सहयोग संरचना को मजबूत करना चाहता है, और साथ ही "ब्रिक्स प्लस" सहयोग का विस्तार करना भी चाहता है, ताकि ब्रिक्स सहयोग की स्थिरता के साथ दीर्घकालिक विकास साकार हो सके, और कोविड-19 महामारी के खिलाफ़ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जीत, विश्व आर्थिक पुनरुत्थान और वैश्विक शासन में सुधार के लिए ब्रिक्स का योगदान दिया जा सके। 

ब्रिक्स देशों के सदस्य होने के साथ-साथ, चीन और भारत जी-20 समूह, शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) और एशियाई आधारभूत संस्थापन निवेश बैंक (एआईआईबी) आदि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सदस्य भी हैं। समान बहुपक्षीय मंच पर चीन और भारत के बीच सहयोग और मैत्री एक दूसरे के समान हितों से मेल खाता है। भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जैसा कि सीमा पर तनाव कम हो गया है और चीन-भारत संबंधों में शैथिल्य लाने के चलते भारत चीन के साथ कुछ नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। जाहिर है चीन के साथ आर्थिक सहयोग से भारत का विकास अविभाज्य है और चीन-भारत सहयोग फिर भी सामान्य प्रवृत्ति है। 
( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )



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