Peace and stability of border

सीमा क्षेत्र की शांति और स्थिरता चीन और भारत के लिए अहम

आप पड़ोसी का चुनाव कर सकते हैं, लेकिन पड़ोसी देश का चुनाव नहीं कर सकते। चीन और भारत न सिर्फ पड़ोसी देश हैं, बल्कि मिलते जुलते भी हैं। भारत की स्वतंत्रता वर्ष 1947 में हुई और नये चीन की स्थापना वर्ष 1949 में हुई। दोनों की बड़ी जनसंख्या है और विकास का रास्ता भी एक जैसा है।
गत 50 के दशक में एशियाई, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन की मुख्य शक्तियां होने के नाते चीन और भारत ने घनिष्ठ से सहयोग किया था, लेकिन बाद में द्विपक्षीय संबंध विपरीत दिशा में विकसित हुए। हालांकि 21वीं शताबदी से चीन-भारत संबंध फिर से गर्म बने, विशेषकर आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के विकास में बड़ी प्रगति मिली, लेकिन भारत हमेशा से चीन को मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है।
अब भारत ने गोली चलाकर उत्तेजना दी। 7 सितंबर को भारतीय सेना ने अवैध रूप से सीमा पार कर चीन-भारत सीमांत क्षेत्र के पश्चिमी भाग स्थित पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे में प्रवेश किया और चीनी सीमा-रक्षा गश्ती सैनिकों को धमकी देने के लिए आसमान में गोली चलायी। लेकिन 8 सितंबर को भारतीय थल सेना ने तथ्यों तक की अवहेला कर लांछन लगाया कि चीनी सैनिकों ने पहले गोली चलायी। किंतु तथ्य तो तथ्य है। भारतीय सेना ने चीन-भारत सीमा क्षेत्र में 45 सालों से बनी शांति को तोड़ दिया और दोनों टुकड़ियों के बीच लंबे समय तक कायम मौन समझौता भी तोड़ा दिया। इसका बहुत खराब प्रभाव पड़ेगा।
इतिहास का सिंहावलोकन करें, 14 दिसंबर 1974 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नंबर 3314 प्रस्ताव पारित किया। इसके अनुसार किसी भी कारण से, जैसाकि राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य या अन्य कारणों से एक देश की टुकड़ियों की अन्य देश का आक्रमण करने या हमला करने की कार्रवाई की सफाई नहीं दी जा सकती। भारतीय सेना की कार्रवाई चीन और भारत के बीच संपन्न संबंधित समझौतों का गंभीर उल्लंघन है।
इतिहास द्वारा छोड़े गये और वर्तमान में मौजूद सवालों को लेकर चीन का हमेशा से यही विचार रहा है कि शांतिपूर्ण और मित्रवत वार्ता के जरिए दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य निष्पक्ष समझौता संपन्न किया जाएगा। चीन हमेशा से अच्छे पड़ोसियों जैसे मैत्रीपूर्ण संबंध कायम रखने की नीति अपनाता है। चीन स्थिति जटिल बनाने या विस्तार करने की कार्रवाई नहीं करता, इसके साथ दृढ़ता से राष्ट्रीय प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करता है।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल में भी कहा कि सीमा मुद्दा चीन-भारत संबंधों से अलग नहीं हो सकता। पिछले 30 सालों में सीमा क्षेत्रों की शांति और स्थिरता बनाए रखने की वजह से चीन-भारत संबंध अच्छे से विकसित हुए। शांति और स्थिरता चीन-भारत संबंधों का आधार है। इसलिए दोनों पक्षों को राजनीतिक स्तर पर काफी गहन वार्ता करने की आवश्यकता है। आपसी समझ और संतुलन काफी अहम है।
दो प्राचीन सभ्यता वाले देश होने के नाते चीन और भारत खुद सीमा मुद्दे का समाधान करने की बुद्धिमत्ता होती है। हालांकि इसका पूरी तरह निपटारा नहीं हुआ, लेकिन दोनों देश सिलसिलेवार समझौतों के जरिए सीमा क्षेत्र की स्थाई शांति बनाए रख सकते हैं। आशा है कि हम शांतिपूर्ण और मित्रवत वार्ता के जरिए शीघ्र ही दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य निष्पक्ष समझौता संपन्न करेंगे।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)