Politics Kidnap Science

"राजनीति किडनैप साइंस" अमेरिकी महामारी निवारण में दिक्कत का स्रोत

अभी तक अमेरिका में नये कोरोनावायरस महामारी से लगे मामलों की संख्या 65 लाख तक जा पहुंची है जबकि मृतकों की मात्रा भी दो लाख हो चुकी है। उधर, सीएनएन की रिपोर्ट है कि अमेरिका में संक्रमण की वास्तविक संख्या मौजूदा पुष्ट मामलों की संख्या से 3 से 20 गुना अधिक हो सकती है।

अमेरिका के पूर्व सीडीसी अध्यक्ष थोमस फ्रेडन ने कहा कि वर्तमान सरकार नये कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने में विफल हुई है। अमेरिका में चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह बताया था कि महामारी से लड़ने के लिए पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन अमेरिकी सरकार ने सच्चाई को छिपाने का तरीका अपनाया। हाल ही में वाशिंग्टन पोस्ट के एक संवाददाता ने यह पर्दाफाश किया कि अमेरिकी राजनेता को फरवरी में ही नए कोरोनोवायरस की अत्यधिक संक्रामक और घातकता मालूम हुई, लेकिन उन्होंने कहा कि यह केवल एक फ्लू ही है। 

उधर, अमेरिकी राजनेताओं ने महामारी की रोकथाम में अपनी कमजोरी का दोष दूसरों पर मड़ने का निरंतर प्रयास किया। चीन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूरोप और अमेरिका के दूसरे पार्टी सब उनके ऐसे प्रयासों के शिकार बने। प्रासंगिक अमेरिकी एजेंसियों के विश्लेषण के अनुसार महामारी फैलने के बाद अमेरिकी समाज में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई 100 साल पहले के स्तर पर लौट आई है। पीयू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि ज्यादातर अमेरिकी नागरिक अमेरिकी सरकार पर भरोसा नहीं करते हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी राजनेता दुर्व्यवहार कर रहे हैं, उनका शासन पारदर्शी नहीं है और वे जनता के प्रति गैर-जिम्मेदार हैं।

77 नोबल पुरस्कार विजेताओं ने मई महीनों में प्रकाशित एक पत्र में कहा कि "महामारी संकट में, विज्ञान का राजनीतिकरण एक खतरनाक प्रवृत्ति है।” लोगों ने यह देखा है कि अमेरिकी राजनेताओं ने अपने राजनीतिक हितों के लिए "राजनीति किडनैप साइंस" किया जिससे अमेरिका में लोगों की जान व्यर्थ बीत गयी, अमेरिकी समाज का विखंडन बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय छवि और ढह गई है।
 
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)