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चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करना भारत के लिए कठिन चुनौती है

भारत सरकार आत्मनिर्भर अभियान बढ़ा रहा है। लोग मानते हैं कि इस कदम का उद्देश्य चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करना है। लेकिन देखने में यह प्रयास कठिनाई का सामना कर रहा है। पिछले मई में यह नारा पेश होने के बाद चीन से भारत का आयात वास्तव में लगातार बढ़ रहा है।

चीन न सिर्फ़ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और आयात का स्रोत देश है, बल्कि ताज़ा आँकड़ों से ज़ाहिर है कि भारत के पूरे आयात में चीन का अनुपात भी बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत के आयात में चीन का अनुपात 13.7 प्रतिशत था, लेकिन पिछले सितंबर तक यह संख्या 18.3 प्रतिशत तक बढ़ी। आत्मनिर्भर बोलने में आसान है, लेकिन करने में मुश्किल।

इस साल से भारत ने चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सिलसिलेवार कदम उठाये, लेकिन तथ्यों से साबित है कि चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करना कठिन चुनौती है। उदाहरण के लिए एक भारतीय कंपनी चीन से जिपर और बटन का आयात करती है, फिर लक्जरी हैंडबैग बनाकर यूरोप को निर्यात करती है। अगर भारत द्वारा निर्मित इन सामान का प्रयोग करती है, तो शायद ऑर्डर कम होंगे, क्योंकि भारत में मिले सामान की गुणवत्ता चीनी उत्पादों की तरह अच्छी नहीं है। कोविड-19 महामारी की वजह से भारत के कुछ व्यवसायों ने चीन से आयात कम किया, लेकिन जब तक महामारी खत्म होगी, तब तक आयात फिर से बढ़ेगा।

पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक ने घोषणा की कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाहियों से कमजोर हो रही है। इसके बावजूद सरकार ने फिर भी कहा कि देश में आर्थिक बहाली शुरू हो चुकी है। लगता है कि भारत सरकार का आत्मनिर्भर पर दृढ़ संकल्प है। भारत ने आरसीईपी में शामिल होने से इनकार कर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत राष्ट्रीय क्षमता मजबूत करने के लिए लगातार आत्मनिर्भर अभियान बढ़ाएगा, न कि आरसीईपी में शामिल करता है। लेकिन इससे भारत के व्यापारी और निर्माता और गहरे संकट में पड़ेंगे।

आरसीईपी के संपन्न होने से जाहिर है कि अधिकांश आर्थिक शक्तियों खुली अर्थव्यवस्था का समर्थन करती हैं और संरक्षणवाद का विरोध करती हैं। जैसा कि सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली ह्सियन लूंग ने कहा कि आरसीईपी से खुलेपन और आपसी संपर्क में एशियाई देशों का समर्थन दिखाया गया है। जापानी प्रधानमंत्री सुगा योशीहाइड ने कहा कि विश्व आर्थिक मंदी होने की स्थिति में मुक्त व्यापार बढ़ाना और महत्वपूर्ण है। चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने कहा कि बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार सही रास्ता है। आरसीईपी न सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग की उपलब्धि है, बल्कि विश्व आर्थिक पुनरुत्थान बढ़ाने में योगदान भी करेगा।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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