China

चीन-भारत विश्वविद्यालों के बीच सहयोग पर पाबंदी लगाना लाभदायक नहीं

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करने के बाद भारतीय शिक्षा मंत्रालय एक नए नियम पर विचार कर रहा है कि भारतीय विश्वविद्यालयों को पड़ोसी देशों के शिक्षा संगठनों के साथ सहयोग ज्ञापन संपन्न करने से पहले सरकार की अनुमति प्राप्त करनी होगी।

यह साफ है कि इस नियम का निशाना चीन है, क्योंकि जमीन पर भारत के कुल छः पड़ोसी देश हैं, यानी कि चीन, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार। इन देशों में चीन और भारत के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग सबसे ज्यादा है।

वास्तव में पिछले अगस्त में भारतीय शिक्षा मंत्रालय ने देश में स्थित 7 कन्फ्यूशियस संस्थानों व कन्फ्यूशियस कक्षाओं और चीन-भारत विश्वविद्यालों के बीच संपन्न 54 सहयोग ज्ञापनों की जांच की थी। आईआईटी, बीएचयू, जेएनयू आदि भारतीय प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की जांच की गईं।

जांच पूरी होने के बाद भारतीय शिक्षा मंत्रालय ने सुझाव पेश किया कि भारत के विश्वविद्यालयों को जमीन पर पड़ोसी देशों के शिक्षा संगठनों के साथ सहयोग ज्ञापन संपन्न करने से पहले सरकार की जांच और अनुमति लेनी होगी।

भारतीय मीडिया के अनुसार शिक्षा मंत्रालय द्वारा यह फैसला करने का एक महत्वपूर्ण कारण है कि उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में चीन की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। भारत इस पर चिंतित है। खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा कि कन्फ्यूशियस संस्थान भारत के लिए खतरा है।

यह सही नहीं है। वास्तव में चीन और भारत के बीच आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ने के चलते भारत में चीनी भाषा सीखने की मांग बढ़ रही है। कन्फ्यूशियस संस्थान में चीन और भारत के बीच सहयोग दस से अधिक साल पुराना है। सभी कन्फ्यूशियस संस्थानों की स्थापना का भारतीय शिक्षा संगठनों ने खुद आवेदन किया। चीन और भारत के विश्वविद्यालयों ने आपसी सम्मान, मित्रवत समन्वय, समानता और आपसी लाभ के आधार पर कानूनी सहयोग समझौता संपन्न किया और कन्फ्यूशियस संस्थानों की स्थापना की।

कई सालों से कन्फ्यूशियस संस्थान भारत में चीनी भाषा की पढ़ाई और चीन-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिसे भारतीय शिक्षा जगत की मान्यता प्राप्त हुई है। आशा है कि भारत के संबंधित विभाग वस्तुगत और निष्पक्ष रूप से कन्फ्यूशियस संस्थान और उच्च शिक्षा में सहयोग देखेंगे और सामान्य सहयोग का राजनीतिकरण करने से बचेंगे, ताकि चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का स्वस्थ और सतत विकास कायम हो सके।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)