Rice exports

चीन को चावल के निर्यात से भारत में आर्थिक मंदी कम होगी

कोविड-19 महामारी से दुनिया के विभिन्न देशों पर प्रभाव पड़ा है। कहा जा सकता है कि अमेरिका और भारत पर प्रभाव सबसे ज्यादा है। अमेरिका दुनिया में सबसे शक्तिशाली विकसित देश है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा तकनीक होने के बावजूद अमेरिका में पुष्ट मामलों की संख्या फिर भी दुनिया में सबसे अधिक है।

जबकि भारत के सार्वजनिक अस्पतालों में लंबे समय से चिकित्सा संसाधनों की कमी है, वहीं निजी अस्पतालों में इलाज बहुत महंगा होता है।  भारत में कोविड-19 मामलों की संख्या अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इसके चलते भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा नुकसान पहुंचा है।

दुनिया में सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश होने के नाते भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्रोत अनाज का निर्यात है, वहीं अनाज का निर्यात करना ही भारतीय किसानों के लिए जीवन बनाए रखने का एकमात्र विकल्प है। महामारी की वजह से भारत में श्रमिकों की कमी, परिवहन में बाधा, अनाज के जमा होने आदि समस्याएं पैदा हुईं, जिससे कृषि विकास में बाधा पैदा हुई और आर्थिक मंदी आयी।

चावल न बिकने की समस्या दूर करने के लिए भारत को कीमत कम कर खरीदारों को आकर्षित करना पड़ा। बताया जाता है कि अब भारतीय चावल के दाम थाईलैंड और वियतनाम के चावल से प्रति टन 30 डॉलर कम हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, वहीं चीन दुनिया का सबसे बड़ा चावल आयातक देश है। हाल में ही भारतीय व्यापारियों ने चीन के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दिसंबर से अगली फरवरी तक चीन को 1 लाख टन चावल का निर्यात किया जाएगा।

गौरतलब है कि साल 2006 में भी भारत ने चीन को चावल भेजना शुरू किया था, उसके पश्चात् 2017-2018 वित्तीय वर्ष में भारत द्वारा चीन को 974 टन गैर-बासमती चावल निर्यात किया गया था।

अब चीन ने फिर से भारतीय चावल खरीदने की इच्छा जताई है, इससे न सिर्फ भारत के चावल को निर्यात का मौका मिला है, बल्कि भारत में आर्थिक मंदी काफी हद तक कम होगी।
गौरतलब है कि चीन एक बड़ा बाजार है, व्यापक क्षेत्रों में चीन की मांग बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, चीन हमेशा विदेशी व्यापार का विविधीकरण बढ़ाता है, जिससे चीन के व्यापारिक साझेदार दिन ब दिन बढ़ रहे हैं। अगर चीनी खरीदार भारत के चावल की गुणवत्ता पर संतुष्ट हुए, तो अगले साल व्यापार का पैमाना बढ़ने की संभावना होगी।

चीन और भारत एशिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश हैं। दोनों हाथ में हाथ डालकर समान विकास कर सकते हैं। चीन के लिए भारत कभी प्रतिद्वंद्वी नहीं रहा। चीन पूरी ईमानदारी से भारत के साथ सहयोग करना चाहता है और एक साथ विकास करना चाहता है। चीन की ईमानदारी और चीन में विकास के अवसर के सामने आशा है कि भारत चीन के साथ सहयोग करेगा और समान विकास करेगा।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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