Corona China

चीन में सभी के लिए कोरोना को लेकर एक जैसे नियम

आजकल पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी की चपेट में है। वैक्सीन बाज़ार में आ जाने के बावजूद सुरक्षा व नियंत्रण के उपाय कम नहीं हुए हैं। इस दौरान चीन ने कोविड-19 महामारी को शानदार तरीके से नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की है। जबकि कई देशों में स्थिति अब भी गंभीर है। आखिर क्या वजह है कि चीन ने इस खतरनाक वायरस को काबू में करने में सफलता पायी है। सबसे पहली वजह यह समझ में आती है कि चीन ने इस वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए सख्त उपाय अपनाए। साथ ही चीनी नागरिकों ने सरकार का पूरा साथ दिया। जिस कारण चीन अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में भी कामयाब हुआ है। 

हालांकि जब चीन ने शुरू में ऐसा किया तो कई पश्चिमी देशों ने उसकी आलोचना की। लेकिन अब वे देश भी इसी तरह के कदम उठा रहे हैं। क्योंकि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए टेस्टिंग, मॉस्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना व सैनिटाइज़र आदि का इस्तेमाल प्रमुख उपाय माने जाते हैं। इसके साथ ही विदेशों से चीन आने वाले लोगों को न्यूक्लिक एसिड की नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट के साथ-साथ कम से कम 14 दिन क्वांरटीन में बिताने होते हैं। चाहे वे विदेशी हों या चीनी मूल के नागरिक, सभी को संबंधित नियमों का पालन करना होता है।  

उधर हाल के दिनों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम चीन के वूहान शहर पहुंची। डब्ल्यूएचओ के सदस्यों को भी क्वारंटीन में रहना पड़ा है। हालांकि कुछ देशों की मीडिया ने इस बात को लेकर भी चीन की आलोचना शुरू कर दी है। आरोप लगाया जा रहा है कि चीन वायरस के स्रोत की जांच में बाधा डालने के लिए ऐसा कर रहा है। जबकि असल स्थिति यह है कि चीन ने पिछले कई महीनों से इसी तरह के कड़े कदम उठाए, जिसके कारण महामारी को काफी हद तक कंट्रोल करने में सफलता भी मिली है। ऐसे में चीन द्वारा डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों को पृथकवास में रखने के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि चीन में आने वाले हर शख्स को इसी तरह के कड़े नियमों से गुजरना पड़ता है।

 (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप  ,पेइचिंग)



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