multilateralism, unilateralism

सुदृढ़ बहुपक्षवाद से एकतरफावाद की प्रतिकूल धारा को रोका जाए

75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा 15 सितंबर को उद्घाटित हुई। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और महासभा के अध्यक्ष वाल्कान बोजकिर दोनों ने बल दिया कि कई खतरों और चुनौतियों के सामने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुदृढता से बहुपक्षवाद की सुरक्षा कर एकतरफावाद का बहिष्कार करते हुए यूएन के प्रति विश्वास स्थापित करना चाहिए। उस दिन विश्व व्यापार संगठन ने फैसला किया कि अमेरिका सरकार द्वारा 2 खरब अमेरिकी डॉलर वाली चीनी वस्तुओं पर लगाया गया टैरिफ गैर कानूनी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में यह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण फैसला एकतरफावाद के खिलाफ एक शक्तिशाली जवाबी हमला है। इधर के कुछ साल अमेरिका फर्स्ट का अनुसरण करने वाले कुछ राजनीतिज्ञों की अगुवाई में वाशिंगटन का एकतरफावाद और संरक्षणवाद तेजी से फैल रहा है ,जिससे बहुपक्षवाद पर भारी नुकसान पहुंचा। हाल ही में यूएन महासचिव गुटेरेस ने सीजीटीएन को दिये एक साक्षात्कार में बताया कि उनके लिए सब से हताशा की बात यह है कि वर्तमान में वैश्विक सहयोग का अभाव है।

लेकिन महा शक्ति के घमंड के सामने अधिकाधिक लोग खड़े होकर एकतरफावाद का विरोध करने लगे हैं ।एक यूएन मत सर्वे में भाग लेने वाले 90 प्रतिशत लोगों का विचार है कि महामारी जैसी वैश्विक चुनौती के निपटारे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है और 74 प्रतिशत लोगों के विचार में यूएन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस से जाहिर है कि बहुपक्षवाद विश्व की मुख्य धारा बनी हुई है। एकतरफावाद और बल राजनीति के धौंस के समक्ष बहुपक्षवाद की सुरक्षा करना एक नाजुक काम है। 

विश्व को एक शक्तिशाली संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है ।विभिन्न देशों को बहुपक्षवाद का संयुक्त मोर्चा स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और नियमों को नष्ट करने वाली कार्रवाई के साथ डटकर संघर्ष करना चाहिए ।यही मानव समुदाय की दीर्घकालिक समृद्धि और स्थिरता की कुंजी है। सबसे बड़े विकासशील देश और यूएन सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य के नाते चीन हमेशा बहुपक्षवाद का सहयोगकर्ता और समर्थक रहता है। हाल ही में चीन ने यूएन की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर एक दस्तावेज जारी कर साफ कहा कि चीन मानव समुझाय के साझे भविष्य के निर्माण को बढ़ाएगा और विश्व शांति व विकास कार्य के लिए योगदान देता रहेगा।