Terrorist , hatched

जम्मू में इस तरह रची जा रही हैं आतंकी साजिशें

कश्मीर में आतंकी गतिविधियों चलाने के लिए कश्मीर में कमांडर नहीं हैं। नए आतंकियों की भर्ती नहीं हो पा रही और न ही पर्याप्त मात्रा में हथियार हैं। वित्तीय मदद भी नहीं मिल पा रही है। शायद यही एक वजह है कि अब आतंकियों ने जम्मू को अपना ट्रांजिट बनाना शुरू कर दिया है। दस दिन के भीतर जम्मू से दो बड़े आतंकी कमांडर पकड़े जाने और इसके बाद बस स्टैंड से आईईडी बरामदगी से यही माना जा रहा है कि आतंकी कश्मीर की जगह जम्मू में आतंकवाद फैलाना चाहते हैं। जम्मू से आतंकियों को अपना नेटवर्क चलाने में ज्यादा मदद मिल रही है। सबसे अधिक मदद आतंकियों को जम्मू, सांबा और कठुआ बॉर्डर से मिल रही है। यहां पर आतंकियों के लिए हथियार भेजे जा रहे हैं। साथ ही वित्तीय मदद जुटाने के लिए हेरोइन जैसे नशे की तस्करी हो रही है। साथ ही जम्मू में बैठकर आतंकी पड़ोसी राज्य पंजाब में भी अपना नेटवर्क चला रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जम्मू और पंजाब बॉर्डर पर आतंकियों ने अपने ओजी वर्करों को सक्रिय किया है। पंजाब में बेहतर मोबाइल नेटवर्क की वजह से आतंकी वहीं बैठकर आतंकी गतिविधियों को चलाने की योजना बना लेते हैं।

एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में आतंकी संगठनों के पास गतिविधियां चलाने के लिए अब संसाधनों की काफी कमी है। इसलिए वह जम्मू का रुख कर रहे हैं। यहां पर उनके लिए सबकुछ आसान है। वह जम्मू से आसानी से सुविधाओं का लाभ उठाकर योजनाएं तैयार कर रहे हैं। लेकिन जम्मू में वह इसलिए पकड़े जा रहे हैं, क्योंकि यहां पर पुलिस का स्थानीय नेटवर्क काफी मजबूत है।






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