China

चीन और अमेरिका के संबंध सुधरने में ही दुनिया की भलाई

ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन और अमेरिका के रिश्तों में बहुत गिरावट देखी गयी। दोनों देशों के व्यापारिक संबंध भी पहले जैसे नहीं रहे। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार चीनी उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने और विवादित बयान दिए जाने से रिश्ते खराब हुए। वहीं पिछले साल सामने आयी कोरोना महामारी के लिए भी अमेरिका ने चीन को ही ज़िम्मेदार उठाया। अमेरिकी नेताओं ने लगातार चीन विरोधी बयान देकर चीन से बेहद दूरी बना ली। यहां तक कि चीनी कंपनियों व नागरिकों पर भी पाबंदी लगाने का ऐलान कर दिया गया। जाहिर सी बात है इन सब चीज़ों का असर साफ देखा जा सकता है। 

जैसा कि हम जानते हैं, चीन और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक ताकतें हैं। ऐसे में अगर इन दो राष्ट्रों के बीच संबंध बिगड़ते हैं तो उसका असर पूरे विश्व पर पड़ता है। जाहिर सी बात है साल 2020 में हमने यही ट्रेंड देखा। इसके साथ ही अमेरिका सहित कुछ पश्चिमी देशों ने चीन को अलग-थलग करने की मुहिम भी चलायी। 

लेकिन हाल ही में अमेरिका में सत्ता परिवर्तन हुआ है, इसलिए विश्व का ध्यान फिर से चीन-अमेरिका रिश्तों पर केंद्रित हो रहा है। हमने देखा कि चीन की ओर से द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जाती रही है। इसी कड़ी में चीनी उप विदेश मंत्री ल यूछंग का यह ताज़ा बयान बहुत महत्व रखता है। जिसमें उन्होंने कहा है कि अब नया साल शुरू हो चुका है और चीन-अमेरिका रिश्तों के लिए भी "पुराने वक्त को अलविदा कहने और नए के स्वागत करने "का समय आ चुका है। चीनी नेता इस बात के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि अब आगे बढ़ने का वक्त है, यानी कि कुछ समय से जारी मतभेदों व विवादों को किनारे रखकर काम करने की जरूरत है।

दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होना, दोनों पक्षों के हित में है। अगर व्यापारिक विवाद होता है या रिश्तों में खटास आती है तो उसका खामियाजा समूचे विश्व को झेलना पड़ता है। कहना होगा कि दोनों देशों को एक-दूसरे से टक्कर लेने की भावना छोड़कर दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाना होगा।

(साभार----चाइना मीडिया ग्रुप  ,पेइचिंग) 
    






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