Jairam Thakur

बजट को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रियों से मंत्रणा करेंगे सीएम

माली साल 2021-22 के बजट को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहयोगी मंत्रियों व विभागीय अधिकारियों का पक्ष जानेंगे। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कोरोना की वजह से ठप्प रही आर्थिक गतिविधियों का असर आगामी साल के बजट में देखने को मिलेगा। कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की वजह से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष विकास कार्यों के लिए और अधिक धनांबटन की चुनौती होगी। प्रदेश के आगामी वित्त वर्ष के बजट में भी विकास कार्यों के लिए सरकार केंद्रीय अनुदानों व केंद्रीय वित्त पोषित योजनाओं पर अधिक निर्भर करेगी। 

प्रदेश विधान सभा का बजट सत्र शुक्रवार से आरंभ हो रहा है। सत्र के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 6 मार्च को अपना चौथा बजट प्रस्तुत करेंगे। वित्त विभाग इन दिनों बजट को तैयार करने में जुटा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पास प्रदेश का वित्त विभाग भी है। लिहाजा बजट को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री मंत्रियों व विधायकों के साथ मंत्रणा करेंगे। उन्होंने बजट के लिए सभी मंत्रियों से अपने विभागों की कार्य योजना देने को कहा है। इसमें से कुछ मंत्री अपनी कार्य योजना को उपलब्ध करवा चुके हैं, जबकि अन्य मंत्रियों को जल्द इसे उपलब्ध करवाने को कहा है। सूत्रों के अनुसार अपने मंडी दौरे के बाद मुख्यमंत्री बजट को लेकर चर्चा करने वाले हैं। इसके आधार पर आगामी बजट में नई योजनाओं का प्रारुप तय किया जाएगा। कोरोना का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। 

लिहाजा सीमित वित्तीय संसाधनों के चलते सरकार के समक्ष विकास कार्यों के लिए अधिक धनाबंटन की चुनौती रहेगी। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में भी विकास कार्य के लिए 100 रुपए में से 41.22 रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका कारण यह है कि बजट की बड़ी राशि वेतन, पेंशन और सरकार की तरफ से लिए गए कर्जों को वापस करने पर खर्च हो रही है। ऐसे में प्रदेश के बजट में इस बार केंद्रीय योजनाओं की झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा सरकार की तरफ से 31 मार्च को समाप्त होने जा रहे वित्तीय वर्ष के लिए आबंटित राशि को समय पर व्यय करने की हिदायत दी गई है। यदि किसी विभाग में लापरवाही के कारण बजट राशि लैप्स हो जाती है, तोे संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। इतना ही नहीं ऐसे विभागों के लिए आगामी वित्त वर्ष में आबंटित बजट में कटौती हो सकती है।



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