Xinjiang

शिनच्यांग में तथाकथित मजबूर श्रम की बात सरासर झूठ

अमेरिका और पश्चिमी देशों के कुछ राजनीतिज्ञों की नजर में चीन के शिनच्यांग बेवुर स्वायत्त प्रदेश के प्रवासी लोगों का सामान्य श्रम तथाकथित मजबूर श्रम है ।वे चीन की विभिन्न जातियों के संबंधों में फूट डालने की कोशिश करते हैं और शिनच्यांग के विकास को रोकना चाहते हैं ।लेकिन तथाकथित मजबूर श्रम की बात सरासर झूठ है ।

वर्ष 2014 में शिनच्यांग में दर्ज हुई गरीब आबादी 31 लाख 31 हजार 8 सौ थी ,खासकर दक्षिण शिनच्यांग चीन में निर्धारित अत्यंत गरीब क्षेत्र है ।लोगों के जीवन का स्तर उन्नत करने के लिए स्थानीय सरकार ने रोजगार को प्राथमिकता दी ।रोजगार के चुनाव में विभिन्न जातियों के श्रमिक अपनी इच्छा के अनुसार संबंधित उद्यमों के साथ श्रम ठेके पर हस्ताक्षर करते हैं और आमदनी प्राप्त करते हैं ।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक शिनच्यांग में रोजगार पाने वाले लोगों की कुल संख्या 1 करोड़ 13 लाख 52 हजार 4 सौ थी ,जो 17.2 प्रतिशत से बढ़ी ।शिनच्यांग में श्रम व रोजगार की नीति तथा कार्यांवयन न सिर्फ चीनी कानून से मेल खाता है ,बल्कि अंतरराष्ट्रीय श्रम और मानवाधिकार के मापदंड से भी मेल खाता है ।मजबूर श्रम की स्थिति मौजूद है ही नहीं ।

वास्तव में शिनच्यांग की विभिन्न जातियों के लोगों के लिए बाहर जाकर श्रम करना गरीबी उन्मूलन का एक अहम रास्ता है ।नवंबर 2020 तक पूरे शिनच्यांग में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल किया गया। 

ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में शिनच्यांग में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2015 से 6986 युआन बढ़ी और सालाना वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत दर्ज हुई ।इससे जाहिर है कि शिनच्यांग के लोग विकास का फल साझा कर रहे हैं और उनका जीवन दिन ब दिन अच्छा हो रहा है।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) 




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