China

अमेरिका का अकारण दबाव चीन को और मजबूत बनाएगा

हुआवेई केवल एक चीनी कंपनी नहीं, वह वैश्विक उद्यम बन चुका है। विशेषकर 5जी क्षेत्र में हुआवेई के आगे होने के बाद अमेरिका को बड़ा संकट महसूस हुआ। अमेरिका की आंखों में 5जी क्षेत्र में हुआवेई की श्रेष्ठता अपने आप में एक बड़ा खतरा है, क्योंकि इससे दुनिया में अमेरिका का प्रभाव कम होगा। इसलिए अमेरिका किसी भी कीमत पर हुआवेई पर दबाव डालता है, ताकि वह कठिनाइयों में फंसे।

हुआवेई पर दबाव डालने के लिए हाल के कुछ वर्षों में अमेरिका ने लगातार अन्य देशों को हुआवेई पर पाबंदी लगाने की धमकी दी। उद्देश्य है कि पूरी दुनिया में हुआवेई को रोका जाये। हुआवेई और इसके अधीनस्थ कंपनियों के खिलाफ चिप पर प्रतिबंध हाल में लागू किया गया, जिससे हुआवेई वाणिज्य माध्यम से चिप नहीं खरीद सकेगा।

लेकिन जैसा कि माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने कहा कि चीन को चिप न बेचने के बाद अमेरिका बहुत सारे उच्च वेतन वाली नौकरियों को छोड़ेगा, इसके साथ चिप पर चीन की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। इतिहास बार बार हमें बताता है कि कुंजीभूत और मुख्य तकनीक दूसरों पर निर्भर नहीं हो सकते। मुख्य तकनीक को अपने हाथ में पकड़ने पर ही मूल रूप से देश की आर्थिक सुरक्षा, प्रतिरक्षा और अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

जबरदस्त अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में, एकतरफावाद और संरक्षणवाद उभरने की स्थिति में कुंजी और मुख्य तकनीक पर पाबंदी तोड़ना उच्च गुणवत्ता वाले विकास और स्थायी शांति के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरों के वश में आने की स्थिति जल्दी से छूट जाना चीन का एकमात्र चुनाव है। इसके मद्देनजर चीनी विज्ञान अकादमी ने विमानन टायर, बेरिंग स्टील और लिथोग्राफी मशीन जैसी मुख्य तकनीक और अहम कच्चे माल पर अध्ययन तेज करने की योजना बनायी है।

तथ्यों से साबित होता है कि चीन के शोधकर्ता तकनीकी कठिनाई दूर करने में सक्षम हैं और धैर्यवान भी। चीन की समानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना और चंद्र अन्वेषण परियोजना में एक के बाद एक सफलता इसका सबसे अच्छा सबूत है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कोई हमेशा आगे नहीं हो सकता, केवल निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश करना है। हुआवेई पर अमेरिका का अकारण दबाव बस चीन को और मजबूत बनाएगा।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)