Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी जी के इस एक मंत्र से मिलेगी समृद्धि और संपत्ति

माँ लक्ष्मी हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वह भगवान विष्णु की पत्नी हैं। पार्वती और सरस्वती के साथ, वह त्रिदेवियाँ में से एक है और धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दीपावली के त्योहार में उनकी गणेश सहित पूजा की जाती है। जिनका उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद के श्री सूक्त में मिलता है। गायत्री की कृपा से मिलने वाले वरदानों में एक माँ  लक्ष्मी भी है। जिन पर यह अनुग्रह उतरता है, वह दरिद्र, दुर्बल, कृपण, असंतुष्ट एवं पिछड़ेपन से ग्रसित नहीं रहता। स्वच्छता एवं सुव्यवस्था के स्वभाव को भी 'श्री' कहा गया है। यह सद्गुण जहाँ होंगे, वहाँ दरिद्रता, कुरुपता टिक नहीं सकेगी।

पदार्थ को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने और उसकी अभीष्ट मात्रा उपलब्ध करने की क्षमता को लक्ष्मी कहते हैं। यों प्रचलन में तो 'लक्ष्मी' शब्द सम्पत्ति के लिए प्रयुक्त होता है, पर वस्तुतः वह चेतना का एक गुण है, जिसके आधार पर निरुपयोगी वस्तुओं को भी उपयोगी बनाया जा सकता है। मात्रा में स्वल्प होते हुए भी उनका भरपूर लाभ सत्प्रयोजनों के लिए उठा लेना एक विशिष्ट कला है। वह जिसे आती है उसे लक्ष्मीवान्, श्रीमान् कहते हैं। शेष अमीर लोगों को धनवान् भर कहा जाता है। गायत्री की एक किरण लक्ष्मी भी है। जो इसे प्राप्त करता है, उसे स्वल्प साधनों में भी अथर् उपयोग की कला आने के कारण सदा सुसम्पन्नों जैसी प्रसन्नता बनी रहती है। जैन धर्म में भी माँ लक्ष्मी एक महत्वपूर्ण देवता हैं और जैन मंदिरों में पाए जाते हैं। लक्ष्मी भी बौद्धों के लिए प्रचुरता और भाग्य की देवी रही हैं, और उन्हें बौद्ध धर्म के सबसे पुराने जीवित स्तूपों और गुफा मंदिरों का प्रतिनिधित्व किया गया था।

ये सभी परेशानियां भी दूर करती हैं देवी माता...
अगर लंबे समय से कई कोशिशों के बाद भी आपका कोई सोचा हुआ काम नहीं बन पा रहा है या फिर धन के मामले में लगातार हानि हो रही है तो मां वैभव लक्ष्मी की पूजा जरूर करें।

इसके अलावा यदि कोर्ट कचहरी के मामले से आप नहीं निकल पा रहे हैं या फिर विद्यार्थियों को सफलता नहीं मिल पा रही है तो माना जाता है कि शुक्रवार को वैभव लक्ष्‍मी का व्रत करने से उन्‍हें सफलता प्राप्‍त होती है। इसके अलावा भी वैभव लक्ष्‍मी की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामना पूरी होती है।

मां वैभव लक्ष्मी की पूजा विधि

मां वैभव लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को सुबह स्‍नान के बाद महिलाएं शुद्ध होकर साफ वस्‍त्र धारण करें। सुबह ही घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करके सारा दिन व्रत रखने का संकल्‍प लें। इस पूरे दिन आप फलाहार करके यह व्रत रख सकते हैं, चाहें तो शाम को व्रत पूर्ण होने के बाद अन्‍न ग्रहण कर सकते हैं।

शुक्रवार को पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को फिर से स्‍नान करें। पूजन करने के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएं। उसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर वैभव लक्ष्‍मी की तस्‍वीर या मूर्ति स्‍थापित करें और श्रीयंत्र को तस्‍वीर के पीछे या बगल में रखें।

वहीं वैभव लक्ष्‍मी की तस्‍वीर के सामने मुट्ठी भर चावल का ढेर लगाएं और उस पर जल से भरा हुआ तांबे का कलश स्‍थापित करें। इसके बाद कलश के ऊपर एक छोटी सी कटोरी में सोने या चांदी का कोई आभूषण रख लें। इसके अलावा वैभव लक्ष्‍मी की पूजा में लाल चंदन, गंध, लाल वस्‍त्र, लाल फूल जरूर रखें।

प्रसाद के लिए घर में गाय के दूध से चावल की खीर बनाएं। अगर किसी कारणवश खीर न बना सकें तो मां लक्ष्‍मी को भोग में आप सफेद मिठाई या फिर बर्फी भी दे सकते हैं। पूजा के बाद लक्ष्‍मी स्‍तवन का पाठ करें या फिर वैभव लक्ष्मी मंत्र का यथाशक्ति जप करें....

मंत्र :
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

वैभव लक्ष्‍मी के व्रत में श्रीयंत्र की भी पूजा करें। पूजा के वक्‍त श्रीयंत्र को लक्ष्‍मी माता के पीछे रखें और पहले उसकी पूजा करें और उसके बाद वैभव लक्ष्‍मीजी की पूजा करें। फिर व्रत कथा पढ़ें और इसके बाद गाय के घी से दीपक जलाकर आरती करें। कथा पूजन के बाद मन ही मन कम से कम 7 बार अपनी मनोकामना को दोहराएं और मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें। उसके बाद मां लक्ष्‍मी का प्रसाद ग्रहण करके घर के मुख्‍य द्वार पर घी का एक दीपक जलाकर रखें।

मां वैभव लक्ष्‍मी का दूसरा मंत्र:
यत्राभ्याग वदानमान चरणं प्रक्षालनं भोजनं।
सत्सेवां पितृ देवा अर्चनम् विधि सत्यं गवां पालनम।।
धान्यांनामपि सग्रहो न कलहश्चिता तृरूपा प्रिया:।
दृष्टां प्रहा हरि वसामि कमला तस्मिन ग्रहे निष्फला:।।