Trans Himalaya International

पर्यावरण संरक्षण पर ट्रांस हिमालय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच आयोजित

पर्यावरण संरक्षण पर ट्रांस हिमालय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच का ऑनलाइन सेमिनार 2 फरवरी को उद्धाटित हुआ। चीनी विदेश मंत्रालय और चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने सेमिनार का संयुक्त आयोजन किया। सेमिनार का मुख्य स्थल ल्हासा में स्थित है, जबकि शाखा स्थल पेइचिंग में है। चीन के उप विदेश मंत्री लुओ चाओहुई ने इस सेमिनार के उद्धाटन समारोह में भाग लिया और भाषण दिया। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सीपीसी के महासचिव वू यिंगच्ये ने एक स्वागत भाषण दिया। जबकि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अध्यक्ष झी जाला ने मुख्य भाषण दिया। चीनी पारिस्थितिक पर्यावरण मंत्रालय के जलवायु परिवर्तन मामलों पर विशेष सलाहकार शिये चनहुआ, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव व बोआओ एशिया मंच (बीएफए) के सभापति बान की मून, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रुड, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के सहायक एवं न्यू दक्षिण एशिया फोरम के संस्थापक सुधींद्र कुलकर्णी, एआईआईबी के उप प्रभारी व महासचिव डैनी एलेक्जेंडर, अमेरिका के ऊर्जा नवाचार फाउंडेशन के संस्थापक व सीईओ हल हार्वे, कनाडा के संसद  सदस्य विक्टर हो, पाकिस्तान की सीनेट की विदेश मामला समिति के अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन सैयद ने इस सेमिनार में भाग लिया और भाषण दिया। भारत, फ्रांस, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, मंगोलिया, ब्राजील, पेरू एवं बोलीविया और एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) आदि 16 देशों और 3 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों और तिब्बत व चीनी विज्ञान अकादमी के देशी-विदेशी अधिकारियों, विद्वानों और विशेषज्ञों ने भी इस सेमिनार में भाग लिया। उन्होंने पठार और पर्वतीय पारिस्थितिक पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और हरित, कम कार्बन व सतत विकास आदि विषयों पर विचार विमर्श किया।

लुओ चाओहुई ने कहा कि चीन जलवायु परिवर्तन के सामने प्रतिभागी एवं योगदानकर्ता और वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण को बढ़ाने के लिये प्रोत्साहक एवं प्रवर्तक है। हमें आम चुनौतियों के सामने सभी देशों को एक साथ करते हुए सहयोग को आगे मजबूत करना चाहिये। पहला, अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को हल करने के लिये अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। दूसरा, चीन वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण प्रक्रिया का प्रवर्तक है। तीसरा, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण प्रक्रिया में चीन ने असाधारण उपलब्धियां प्राप्त की हैं। चौथा, ट्रांस हिमालय क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। 
वू यिंगच्ये ने स्वागत भाषण में कहा कि छिंगहाई-तिब्बत पठार में पर्यावरणीय वातावरण संरक्षण कार्यों पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अधिक महत्वपूर्ण निर्देश दिया। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पुरी दुनिया में अंतिम शुद्ध भूमि की रखवाली और सुंदर छिंगहाई-तिब्बत पठार बनाने के लिये नये योगदान देने और स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर बनाने की अपील की। शी चिनफिंग के शब्दों का पालन करने के साथ-साथ तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने सबसे कठोर पारिस्थितिक सुरक्षा नीतियों को लागू किया। वर्ष 2020 में तिब्बत में अच्छी वायु गुणवत्ता के दिनों की संख्या का औसत 99 प्रतिशत से अधिक पहुंचा, जबकि तिब्बत भर में मुख्य नदियों और झीलों की जल गुणवत्ता तीसरे मानक के अनुकूल या इससे बेहतर है। वर्तमान में तिब्बत पूरी दुनिया में सबसे अच्छे पारिस्थितिकी पर्यावरण वाले क्षेत्रों में से एक है।

झी जाला ने कहा कि तिब्बत मैत्रीपूर्ण देशों और क्षेत्रों के साथ नीति संवाद और संपर्क मजबूत करना चाहता है। साथ ही ट्रांस हिमालय क्षेत्र में पारिस्थितिक पर्यावरण के एकीकृत संरक्षण में नया योगदान देने के लिये तिब्बत को इन पक्षों के साथ गहरा संचार और सहयोग करना चाहिये। वहीं केविन रुड ने कहा कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में चीन नेतृत्वकारी स्थिति में है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चीन के ग्रीन विकास की अवधारणा पर और अधिक ध्यान देता है। वे जलवायु क्षेत्र में चीन की नेतृत्व क्षमता देखने के लिए तत्पर हैं। जो बाइडेन द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने से जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में चीन और अमेरिका दोनों पक्षों को मौके मिलेंगे।  

वहीं सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि पहला, सभी देशों को हिमालय में नाजुक पारिस्थितिक वातावरण की रक्षा करनी चाहिये। दूसरा, हिमालय जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव में रहा है। एशिया के अधिकांश देशों के लोगों को हिमालय पर भरोसा हैं। इन देशों में जल सुरक्षा व खाद्य सुरक्षा आदि मुद्दों के लिये हिमालय बहुत महत्वपूर्ण है। तीसरा, हिमालय का पारिस्थितिकी तंत्र भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान भूमि अधिकार विवाद आदि गंभीर चुनौतियों के सामने है। चौथा, “बेल्ट एंड रोड”प्रस्ताव न केवल चीन और पाकिस्तान आदि देशों, बल्कि भारत के लिये भी एक अच्छा मंच है। भारत को इस प्रस्ताव में भाग लेना चाहिये। पांचवां, हिमालय के पारिस्थितिक संरक्षण के लिये क्षेत्रीय और विश्व सहयोग की जरूरत है। छठा, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पारिस्थितिक संरक्षण विज्ञान के निवास को मजबूत करना चाहिये। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित मानव भाग्य समुदाय का संयुक्त निर्माण मानव सामूहिक ज्ञान का क्रिस्टलीकरण है। प्रतिनिधियों ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण क्षेत्र में उत्तरदायी चीन का सक्रिय मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में महामारी के फैसले के सामने चीन में इस बार के सेमिनार का आयोजन बहुत महत्वपू्र्ण और सार्थक है। सभी देशों को एक साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन आदि मुख्य चुनौतियों का सामना करने, और व्यावहारिक व प्रभावी उपाय करने और महामारी के बाद विश्व अर्थव्यवस्था में ग्रीन सुधार पुनर्निर्माण एवं सतत विकास को बढ़ाना चाहिये।  

गौरतलब है कि ट्रांस हिमालय क्षेत्रीय देशों में जनसंख्या बड़ी है, यहां बाजार की संभावना भी बहुत है। इस क्षेत्र में विभिन्न देशों का इतिहास और संस्कृति समान है, जो संसाधनों और ऊर्जा से भरपूर है। संबंधित देशों के बीच आर्थिक संपूरकता बहुत अधिक है, जबकि उनके बीच मैत्रीपू्र्ण आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाने की संभावना भी काफी है। चीनी विदेश मंत्रालय के समर्थन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने वर्ष 2018 ट्रांस हिमालय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच की स्थापना की। अब तक तिब्बत के निंगची शहर में दो बार मंच का आयोजन हो चुका है।  

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)



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