Punjab Thermal Plant

केंद्र और पंजाब की खींचतान बनी मुसीबत, अंधेरे में डूब न जाए पंजाब

पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन की वजह से अब पंजाब अंधेरे में डूबने की कगार पर है। एक तरफ किसानों की जिद्द है कि जब तक केंद्र सरकार नए कृषि कानून रद्द नहीं करती, तब तक वे आंदोलन वापिस नहीं लेगें, हालांकि इस दौरान रेलवे ट्रैक पर बैठे किसानों ने 22 अक्टूबर को सिर्फ मालगाड़ियों को आने-जाने की अनुमति देकर ट्रैक खाली कर दिये थे और 2 दिन मॉलगाड़ियों की आवाजाई हुई लेकिन अब रेलवे विभाग इस बात पर अड़ गया है कि जब तक सभी तरह की रेलगाड़ियों को आने जाने का रास्ता साफ नहीं किया जाता तब तक मालगाड़ियां भी नहीं चलाई जाएंगी।

ऐसे में अब पंजाब का अंधेरे में डूबना तय होता नजर आ रहा है क्योंकि पंजाब में चलने वाले सभी थर्मल प्लांट लगभग बंद हो चुके हैं। वहीं, गुरुवार को पंजाब सरकार के 3 मंत्रियों के साथ हुई भारतीय किसान यूनियन उगराहां की बैठक भी किसी नतीजे पर पहुंचे बिना ही खत्म हो गई थी, फिलहाल पंजाब सरकार केंद्रीय ग्रिड से बिजली खरीद रही है। लेकिन ये सिलसिला ज्यादा देर तक नहीं चल पाएगा। क्योंकि पंजाब सरकार के पास बिजली खरीदने के लिए अधिक पैसा नहीं है

क्या है पंजाब में इस वक्त हालात 

बठिंडा के तलवंडी साबो का पंजाब का सबसे बड़ा थर्मल प्लांट 2,000 मेगावाट बिजली तैयार करता है। वहीं पटियाला के नाभा का एक और बड़ा थर्मल प्लांट 1,400 मेगावाट बिजली तैयार करता है जबकि तीन छोटे और थर्मल प्लांट है जो कि पंजाब में बिजली की कमी नहीं होने देते लेकिन कोयले की लगातार सप्लाई नहीं होने की वजह से अब इन तमाम थर्मल प्लांट के पास 1 से 2 दिन का ही कोयला बचा है। इसी वजह से आने वाले दिनों में पंजाब में पावर कट बढ़ जाएंगे और साथ ही राज्य पर ब्लैकआउट होने का खतरा भी मंडरा रहा है। रोपड़ और लहरा- मोहब्बत के 2 बड़े थर्मल प्लांट बंद हो चुके हैं और तीन छोटे थर्मल प्लांटों के पास कुछ ही दिन का कोयला स्टॉक बचा है जिसे आपात स्थिति के लिए रखा गया है। 

किसानों का क्या है कहना 

किसानों का इस बारे में कुछ और ही कहना है। किसानों ने यह बात साफ कर दी है कि वो मालगाड़ियों को आने- जाने के लिए रेलवे ट्रैक खाली कर दिए गए हैं लेकिन इन पर यात्री गाड़ियों को हरगिज नहीं चलने दिया जाएगा।इसके अलावा किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र किसानों के आंदोलन को खत्म करने के लिए ट्रैक रोके जाने का बहाना बना कर पंजाब को तंगहाली की ओर ले जाना चाहता है। जबकि उन्होनें तो सिर्फ प्राइवेट थर्मल प्लांट को जाने वाले रेल ट्रैक रोक रखे हैं जबकि सरकारी थर्मल प्लांट पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है। 

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर, शुक्रवार को एक बार फिर पंजाब सरकार के कुछ मंत्री, किसान मजूदर संघर्ष कमेटी के साथ बैठक करने जा रहे हैं। इसका क्या नतीजा होगा यह तो बैठक खत्म होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।