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अमेरिका के थाईवान संबंधी अधिनियम से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा- चीन

हाल में अमेरिकी नेता ने 2021 वित्तीय वर्ष के व्यापक विनियोग अधिनियम पर हस्ताक्षर किये, जिसमें तथाकथित थाईवान गारंटी कानून की धारा शामिल है। इस धारा में थाईवान को अमेरिका सरकार की हथियार बिक्री को सामान्य प्रक्रिया बताया गया है। साथ ही कहा गया कि अमेरिका थाईवान के अनेक अहम अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में हिस्सा लेने का समर्थन भी करेगा। अमेरिका की इस कार्रवाई ने चीन के अंदरूनी मामलों में घृष्ठतापूर्वक हस्तक्षेप किया और चीन के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया। इस चीन ने जबरदस्त खंडन और विरोध किया है। 

थाईवान मुद्दा चीन की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता से संबंधित है, साथ ही चीन-अमेरिका संबंध का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल भी है। 1979 में जारी चीन-अमेरिका राजनयिक संबंधों की स्थापना के ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिका यह मान्यता देता है कि चीन लोक गणराज्य चीन की एकमात्र कानूनी सरकार है। अमेरिकी राजनेता इस बारे में स्पष्ट रूप से जानते हैं। लेकिन उन्होंने शीत युद्ध की विचारधारा पर आधारित चीन के केंद्रीय हित संबंधी थाईवान सवाल पर बार-बार गलतियां की। बीते 4 सालों में अमेरिका ने 11 बार थाईवान को हथियार बेचे, केवल इस साल 6 बार हथियारों की बिक्री की जा चुकी है। इस साल अमेरिका ने तथाकथित 2019 थाईपेई अधिनियम को कानून बनाया और 10 से अधिक बार सैन्य जहाजों को थाईवान जलडमरुमध्य में भेजा। और तो और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि थाईवान चीन का एक भाग नहीं है और खुलेआम चीन-अमेरिका राजनयिक संबंधों की स्थापना के राजनीतिक आधार को पैरों तले रौंदा है। 

लेकिन अमेरिकी राजनेता भले ही कितनी भी कोशिश क्यों न करें, चीन पर इसका कोई असर नहीं पड़ सकता है। इससे पहले चीन ने लोकहिड मार्टिन कॉपरेशन, बोइंग इटिग्रेटेड डिफेन्स सिस्टम्स और रेइथोन कंपनी आदि अमेरिकी सैन्य उद्यमों और थाईवान को हथियार बिक्री करने की प्रक्रिया में बुरी भूमिका अदा करने वाले अमेरिकी निजी लोगों या यथार्थ इकाइयों के खिलाफ प्रतिबंध लगाया। इसमें चीन द्वारा देश की प्रभुसत्ता की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प दिखता है। हाल में चीन-अमेरिका संबंध राजनयिक संबंधों की स्थापना की सबसे गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका की नयी सरकार एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के हितों की रक्षा करना चाहती है, इसलिए हमें जानना चाहिए कि थाईवान सवाल बहुत जटिल और संवेदनशील है। अमेरिका को गलत और खतरनाक रास्ते में आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)



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