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टिप्पणी : अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को दोष लगाना चाहा

अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनेक बार आलोचना की। अमेरिकी नेता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमेरिका को गलत महामारी-रोधी सुझाव पेश किया है। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पम्पिओ ने 8 अप्रैल को कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उचित प्रगति हासिल नहीं की, और इसे विनियोग पर पुनः विचार करने की धमकी दी।

ब्रिटेन के अखबार ने 8 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट में कहा कि महामारी की रोकथाम के प्रति अमेरिकी सरकार ने बार-बार अपनी जिम्मेदारियों को खारिज किया। इससे अपने देश में महामारी की रोकथाम तथा अंतर्राष्ट्रीय महामारी रोधी सहयोग को बाधित किया जाएगा। वास्तव में विश्व स्वास्थ्य संगठन के खिलाफ अमेरिका द्वारा की गयी आलोचना बिल्कुल निराधार है। नये कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन के साथ घनिष्ठ सहयोग कर समय में वायरल जीन अनुक्रम प्राप्त किया और वुहान का दौरा करने के लिए अपने स्टाफ भेजे। 

महामारी के खतरे का मूल्यांकन करने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 30 जनवनरी को इसे "अंतर्राष्ट्रीय चिंता की आपातकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना" घोषित किया और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए "अलार्म" बजाया। लेकिन अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने इस बात पर काफी ध्यान नहीं दिया। 13 मार्च तक ही अमेरिका ने राष्ट्र का आपातकाल घोषित किया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी से 43 दिन हो गये। 

अमेरिका की आलोचना के प्रति विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस ने कहा कि महामारी का इस्तेमाल कर राजनीतिक हमला करना आग से खेलने जैसा है। अगर अधिक बॉडी बैग नहीं देखना चाहते हैं, तो वायरस को राजनीति से दूर रखना चाहिए, और राजनीति को महामारी से अलग रखना चाहिये। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपने वक्तव्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यों का समर्थन करने की अपील की। 

उधर, अमेरिका ने महामारी की रोकथाम के सवाल पर इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की आलोचना की है कि वह अपनी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी से भागना चाहा। फरवरी माह में अमेरिकी सरकार ने अपनी वर्ष 2021 वित्तीय बजट रिपोर्ट में यह पेश किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली धन राशि को पिछले साल की 12.3 करोड़ अमेरिकी डालर से घटकर 5.8 करोड़ अमेरिकी डालर तक गिराया जाएगा। व्यंग्य की बात है कि 29 फरवरी तक अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2019 खर्च को डिफ़ॉल्ट किया है, और डिफ़ॉल्ट दर 70% से अधिक है।

यह बात भी चर्चा करने योग्य है कि विश्व में सबसे बड़ा विकसित देश होने के नाते अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन के संचालन को धनराशि देनी चाहिये, यह उसका अंतर्राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। लेकिन अमेरिका अपने राजनीतिक हित की दृष्टि से इसे धनराशि बन्द करने की धमकी देता है। इससे "अमेरिकन फर्स्ट" की विचारधारा प्रतिबंबित होता है। 

वर्तमान में महामारी के फैलाव के चलते चिकित्सा संसाधन का अभाव दिखता रहा है। विकासमान देशों को अंतर्राष्ट्रीय सहायता की जरूरत है। इस स्थिति में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को वित्तीय सहायता बन्द करने की धमकी दी है जिससे अंतर्राष्ट्रीय महामारी-रोधी सहयोग को खतरे में डाला जाएगा और इससे अमेरिका सहित सभी देशों के लोगों को नुकसान पहुंचेगा। अब अमेरिका महामारी फैलाव का केंद्र बना है। पुष्ट मामलों की संख्या 4.2 लाख और मृतकों की संख्या भी 14 हजार तक जा पहुंची है। केवल अपनी शक्ति पर निर्भर रहने से महामारी की रोकथाम नहीं की जा सकेगी।
  (साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)