snow break between China and India

चीन और भारत के बीच बर्फ कब तोड़ा जाएगा

भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण से 29 जून और 2 सितंबर को क्रमशः 59 और 118 चीनी एप्स पर बैन लगाया। 24 नवंबर को भारत ने समान वजह से फिर से 43 चीनी एप्स पर बैन लगाने की घोषणा की। अब तक भारत ने कुल 220 चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाया है।

ध्यानाकर्षक है कि इस बार AliSupliers Mobile, Alibaba Workbench, AliExpress और Alipay जैसे अलीबाबा के कई एप्स भी शामिल हैं। भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने इसे डिजिटल प्रहार बताया।
चीनी एप्स के अलावा, भारत सरकार ने सरकारी खरीद, सड़क, रेलवे और बिजली संयंत्र आदी बुनियादी संस्थापनों के निर्माण में चीनी निवेश पर भी प्रतिबंध लगाया। कुछ नागरिक संगठनों ने “बायकॉट चाइना” अभियान शुरू कर दिया। सोशल मीडिया में कुछ भारतीय नेटीजन सरकार का समर्थन करते हैं, जबकि अधिक भारतीय लोगों का मानना है कि सरकार का कदम उचित नहीं है।
भारतीय मीडिया ने भी मान लिया कि “बायकॉट चाइना” कहने में आसान है, जबकि करने में मुश्किल। हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और मुंबई मिरर ने क्रमशः रिपोर्ट जारी कर कहा कि “बायकॉट चाइना” से भारत को कोई लाभ नहीं पहुंचेगा। हिंदुस्तान टाइम्स ने कहा कि यह अभियान परिपक्व नहीं है। अगर चीन का बहिष्कार करते हैं, तो इसके बदले में भारत को अन्य उत्पादों की खोज करनी पड़ेगी। यह आसान नहीं है।

वास्तव में चीन सरकार हमेशा विदेशों में स्थित चीनी उद्यमों से अंतर्राष्ट्रीय नियम और कानून के अनुसार व्यापार करने की मांग करती है। चीन सरकार चीनी कंपनियों से स्थानीय रीति रिवाज का सम्मान करने की मांग भी करती है। आशा है कि भारत चीन समेत विदेशी उद्यमों को न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और भेदभाव रहित वाणिज्य वातावरण तैयार करेगा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन के नियमों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण कार्रवाई ठीक करेगा।चीन और भारत एक दूसरे की धमकी के बजाय विकास के अवसर हैं। दोनों पक्षों को वार्ता के आधार पर द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंध को सही रास्ते पर लाना चाहिए, ताकि दोनों देशों की जनता को लाभ मिले और साझी जीत पूरी हो सके।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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