Xi Jinping

"दावोस एजेंडा" संवाद में शी चिनफिंग के भाषण ने प्रदर्शित की प्रमुख देश की जिम्मेदारी:विशेषज्ञ

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 25 जनवरी को पेइचिंग में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए विश्व आर्थिक मंच दावोस एजेंडा संवाद में भाषण दिया, जिसका शीर्षक है “मानव प्रगति के लिए बहुपक्षवाद की मशाल को उठाये रखो।” इस बारे में कई अंतर्राष्ट्रीय मामला विशेषज्ञों का मानना ​​है कि शी चिनफिंग के इस भाषण में समय के मुद्दों के विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नेतृत्व करने और वैश्विक शासन का सुधार करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे प्रमुख देश के रूप में चीन की जिम्मेदारी प्रदर्शित हुई है। 

चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के अमेरिकी संस्थान की उप निदेशक सुश्री सू श्याओहुई ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने स्पष्ट शब्दों से मौजूदा दुनिया की पुरानी बीमारियों को सामने रख दिया। शी चिनफिंग ने कहा कि वैचारिक टकराव दुनिया की एक पुरानी बीमारी है, जिससे न केवल प्रमुख शक्तियों के बीच संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बनाया गया, बल्कि भविष्य में दुनिया की एकता और सहयोग, मानव साझे भाग्य के समुदाय के निर्माण को सीधी चुनौतियां दी जाएंगी। एक और पुरानी बीमारी है विकास की खाई। अब विकासशील देश बहुत गंभीर परीक्षा से गुजर रहे हैं। चाहे महामारी हो या कुछ देशों की एकतरफावाद और संरक्षणवाद, उसने इस खाई को और गहरी कर दी है। 

चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष काओ फेइ का मानना ​​है कि शी चिनफिंग ने वर्तमान दुनिया के सामने मौजूद सबसे फौरी मामलों को प्रस्तुत किया, जिनमें से विकास मामला सबसे अहम है। महामारी के प्रभाव के तहत पूरी दुनिया कई समस्याओं का सामना कर रही है, विशेष रूप से उत्तर-दक्षिण समस्या। कुछ विकासशील देशों और विकसित देशों के बीच का अंतर छोटा नहीं हो रहा, बल्कि बड़ा हो गया। विकास मामला सबसे मुख्य समस्या ही है। चीन के भावी कार्यों पर चर्चा करते हुए शी चिनफिंग ने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय महामारी-रोधी सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेगा, समान लाभ व आपसी लाभ वाली रणनीति को लागू करेगा, सतत विकास को बढ़ाते हुए तकनीकी नवाचार और नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के निर्माण को बढ़ावा देगा। इस बारे में काओ फेइ ने कहा कि चीन ने जैसा वादा किया है वो वैसा करेगा, जो कि एक जिम्मेदाराना शक्ति के रूप में चीन की जिम्मेदारी ही है। 
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)




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