कश्मीर के इन ऐतिहासिक, धार्मिक और प्रा

आप भी जानिए कश्मीर के इन ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के बारे में

पौराणिक मान्यताओं, राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण की कथा के अनुसार कश्‍मीर की घाटी कभी बहुत बड़ी झील हुआ करती थी। कश्यप ऋषि ने यहां से पानी निकाल लिया और इसे मनोरम प्राकृतिक स्‍थल में बदल दिया। इस तरह कश्मीर की घाटी अस्तित्व में आई। हालांकि भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार खदियानयार, बारामूला में पहाड़ों के धंसने से झील का पानी बहकर निकल गया और इस तरह कश्मीर में रहने लायक स्थान बने। राजतरंगिणी 1184 ईसा पूर्व के राजा गोनंद से लेकर राजा विजय सिम्हा (1129 ईसवी) तक के कश्मीर के प्राचीन राजवंशों और राजाओं का प्रमाणिक दस्तावेज है।

कश्मीर का श्रीनगर :
1. हरिपर्वत : कश्मीर को पहले सतीसर कहा जाता था और श्रीनगर जिसका पुराना नाम प्रवर पुर है, इसी शहर की दोनों ओर हरिपर्वत और शंकराचार्य पर्वत हैं आद्म शंकराचार्य ने इसी पहाड़ी पर भव्य शिवलिंग, मंदिर और नीचे मठ बनाया था।

2. देवतार के वृक्ष : श्रीनगर के बहाने आप भारत के सबसे खूबसूरत राज्य जम्मू और कश्मीर में घूम सकते हैं। यहां जहां अमरनाथ की गुफा है तो दूसरी ओर बर्फ से ढंगे खूबसूरत पहाड़, झील और लंबे-लंबे देवतार के वृक्ष। यह वृक्ष समूचे कश्मीर की शोभा बढ़ाते हैं।

3. खूबसूरत झीलें कश्मीर घाटी में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और खासकर हनीमून के लिए तो ये हमेशा से आइडियल डेस्टिनेशन रहा है। 1700 मीटर ऊंचाई पर बसा ये शहर विशेष तौर पर झीलों और हाउस बोट के लिए जाना जाता है। कमल के फूलों से सुसज्जित डल झील पर कई खूबसूरत नावों पर तैरते घर हैं जिन्हें हाउस बोट कहा जाता है। अगर आपको भीड़-भाड़ से दूर एकदम शांत वातावरण में किसी हाउस बोट में रहने की इच्छा है तो आप नागिन लेक या झेलम नदी पर खडे हाउस बोट में ठहर सकते हैं। नागिन झील भी कश्मीर की सुंदर और छोटी-सी झील है। आमतौर पर यहां विदेशी सैलानी ही ठहरना पसंद करते हैं।

4. बाग बगीचें : खूबसूरत झील के बाद बात आती है आकर्षक बाग-बगीचों की। यहां मौजूद मुगल गार्डन इतने बेहतरीन और सुनियोजित ढंग से तैयार किया गया है कि मुगलों का उद्यान-प्रेम इनकी खूबसूरती के रूप में यहां आज भी झलकता है। इसके अलावा शालीमार बाग, निशात बाग जैसे कई महत्वपूर्ण उद्यानों को देखे बिना श्रीनगर का सफर अधूरा-सा लगता है। इन उद्यानों में चिनार के पेड़ों के अलावा और भी छायादार वृक्ष हैं। रंग-बिरंगे फूलों की तो इनमें भरमार रहती है। इन उद्यानों के बीच बनाए गए झरनों से बहता पानी भी बेहद आकर्षक लगता है।

5. रौजबल : कश्मीर के श्रीनगर शहर के एक पुराने इलाके खानयार की एक तंग गली में 'रौजाबल' नामक पत्थर की एक इमारत में एक कब्र बनी है जहां एक मान्यता के अनुसार ईसा मसीह का शव रखा हुआ है। कई लोग यहां इस कब्र को देखने आते हैं। आधिकारिक तौर पर यह मजार एक मध्यकालीन मुस्लिम उपदेशक यूजा आसफ का मकबरा है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि यह नजारेथ के यीशु यानी ईसा मसीह का मकबरा या मजार है। लोगों का यह भी मानना है कि सन् 80 ई. में हुए प्रसिद्ध बौद्ध सम्मेलन में ईसा मसीह ने भाग लिया था। श्रीनगर के उत्तर में पहाड़ों पर एक बौद्ध विहार का खंडहर हैं जहां यह सम्मेलन हुआ था।

6.गुलमर्ग : यह सबसे खूबसूरत जगह है। बर्फ से ढके पहाड़ों, हरे-भरे घास के मैदान, सदाबहार जंगलों वाली पहाड़ियों और घाटियों से घिरा हुआ गुलमर्ग नीमून के शीर्ष स्थानों में से एक है और इसे एडवेंचर हब के रूप में भी विकसित किया गया है।

7.पहलगाम और बालटाल : प्राकृतिक सौंदर्य से भूरपूर हरे-भरे खेतों से लबालब पहलगाम में लिद्दर झील में रिवर राफ्टिंग, गोल्फिंग और पारंपरिक कश्मीरी वस्तुओं की खरीददारी कर सकते हैं। इसी तरह सोनमर्ग श्रीनगर से 80 किमी उत्तर-पूर्व में बर्फ से भरे मैदानों, राजसी ग्लेशियरों और शांत झीलों से घिरा हुआ है। सोनमर्ग शहर से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर, समुद्र तल से 2743 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बालटाल घाटी कश्मीर में सबसे आकर्षक जगहों में से एक है। सिंधी नदी के किनारे पर स्थित बालटाल घाटी पर्यटकों के लिए बर्फ़ के पहाड़ों के लुभावने दृश्य प्रस्तुत करता है।

8. दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान :दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान, जम्मू और कश्मीर श्रीनगर के मुख्य शहर से मात्र 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

9. पुलवामा : पुलवामा श्रीनगर जिले का एक छोटा शहर है जहां कभी भव्य मंदिर हुआ करते थे परंतु अब खंडरह ही बचे हैं। वर्तमान में यह शहर अपने सेब के बागों, प्राकृतिक झरनों और प्राकृतिक घाटियों के लिए प्रसिद्ध है। ग्रीष्मकाल में पर्वतारोहण और ट्रेकिंग और सर्दियों में स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के अवसर भी यहां आपको मिलेंगे।

10. युसमर्ग : लगभग 7,500 फीट की ऊंचाई पर पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के केंद्र में स्थित युसमर्ग बहुत ही खूबसूरत जगह है। इसे यीशु का मेदो भी कहते हैं। एक मान्यता के अनुसार यह वह स्थान है जहां यीशु (ईसा मसीह) एक बार रहे थे।

हिन्दू मंदिर :

1.ज्वालादेवी मंदिर : जम्मू और कश्मीर के कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के पुलवामा से करीब 17 किलोमीटर दूर खरेव में माता ज्वालादेवी का मंदिर है। दो वर्ष पहले कट्टरपंथियों ने इस मंदिर में आग लगागर इसे नष्ट कर दिया। अब यह खंडर ही है। दक्षिण कश्मीर में स्थित यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की ईष्ट देवी का मंदिर है।

2.खीर भवानी मंदिर : जम्मू और कश्मीर के मध्य कश्मीर के गंदेरबल जिले के तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की आराध्य रंगन्या देवी का मंदिर है। यहां वार्षिक खीर भवानी महोत्सव मनाया जाता है, लेकिन आतंकवाद के चलते अब यह बंद है। यह मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं बहती हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच इस मंदिर के दर्शन करने की तमन्ना हर कश्मीरी पंडित में रहती है।

इस मंदिर का पुन: निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया जिसे बाद में महाराजा हरी सिंह द्वारा पूरा किया गया। इस मंदिर से जुडी एक प्रमुख किवदंती ये है कि सतयुग में भगवान श्री राम ने अपने निर्वासन के समय इस मंदिर का इस्तेमाल पूजा के स्थान के रूप में किया था।

3.सूर्य मंदिर : हमारे जम्मू संवाददाता सुरेश डुग्गर के अनुसार दक्षिण कश्मीर के मार्तंड स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर लगभग 1400 पुराना है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा अशोक के बेटे जलुका ने 200 बीसी में करवाया था जबकि मंदिर के भीतर जो वर्तमान ढांचा है उसका निर्माण किसी अज्ञात हिन्दू श्रद्धालु ने जहांगीर के शासनकाल के दौरान करवाया था। इस मंदिर से पूरी पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला और शहर का प्रत्येक भाग देखा जा सकता है।

400 वर्ष पहले कारकूट खानदान से संबंधित राजा ललितादित्य मुख्यपादय ने मंदिर को अंतिम रूप दिया था। कारकूट वंश के राजा हर्षवर्धन ने ही 200 साल तक सेंट्रल एशिया सहित अरब देशों में राज किया था। पहलगाम का मशहूर शीतल जल वाला चश्मा इसी वंश से संबंधित है।

ऐसी किंवदंती है कि सूर्य की पहली किरण निकलने पर राजा अपनी दिनचर्या की शुरुआत सूर्य मंदिर में पूजा कर चारों दिशाओं में देवताओं का आह्वान करने के बाद करते थे। वर्तमान में खंडहर की शक्ल अख्तियार कर चुके इस मंदिर की ऊंचाई भी अब 20 फुट ही रह गई है। मंदिर में तत्कालीन बर्तन आदि अभी भी मौजूद हैं।

4.भवानी मंदिर : भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के कश्मीर में जिला अनंतनाग के लकडिपोरा गांव में स्थित यह भवानी मंदिर की देखरेख अब स्थानीय मुसलमान करते हैं। साल 1990 में कश्मीर में हिंसक आंदोलन शुरू हुआ तो कश्मीर घाटी में रहने वाले लाखों पंडितों को अपने घर-बार छोड़कर जाना पड़ा था। इस गांव से भी हिन्दू पलायन कर गए तो यह मंदिर सूना हो गया।

5.शीतलेश्वर मंदिर : श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में 2000 साल पुराना शीतलेश्वर मंदिर है। जर्जर अवस्था में पहुंच चुके इस मंदिर को कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने स्थानीय मुस्लिम आबादी के सहयोग से फिर से आबाद किया था लेकिन लगातार हिंसा के चलते अब यह विरान पड़ा है। हालांकि समय समय पर यहां कश्मीरी पंडित जाते रहते हैं।

6.शंकराचार्य मंदिर : आदि शंकराचार्य ने देश भर में भ्रमण करके ऐसा स्थानों की खोज की जो प्राचीन भारत के गौरवपूर्ण स्थान थे। ऐसे ही प्राचीन महत्वपूर्ण देवस्थलों में शामिल है श्रीनगर का यह प्राचीनतम शिव मंदिर जिसे ज्येष्टेश्वर मंदिर कहा जाता है। कालांतर में इसे आदि शंकराचार्य मंदिर कहा जाने लगा। वर्तमान में इसे तख्‍त-ए- सुलेमान नाम के नाम से पुकारा जाने लगा है। श्रीनगर की पहाड़ी पर बसा यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा संदीमान ने कराया था। उस समय यहां 300 स्वर्ण-रजत प्रतिमाएं थीं। सन् 426 से 365 ईसापूर्व कश्मीर पर गोपादित्या का शासन था। उन्होंने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। इससे पूर्व 697 से 734 ईसा पूर्व तक शासन करने वाले राजा ललितादित्य ने भी इसके रखरखाव की व्यवस्था की। शाह हमदानी जब सत्तरहवीं शताब्दी में कश्मीर आए तो उन्होंने कश्मीर को बाग-ए-सुलेमान एवं मंदिर स्थल को तख्ते सुलेमान नाम दिया।

6.त्रिपुरसुंदरी मंदिर : दक्षिण कश्मीर के देवसर इलाके में त्रिपुरसुंदरी मंदिर को कट्टरपंथियों ने तोड़ दिया। यह मंदिर घाटी के कुलगाम जिले के देवसर क्षेत्र में है। यह मंदिर भी कश्मीरी हिन्दुओं की आस्था का प्राचीन केंद्र है।

7.मट्टन : पहलगाम मार्ग पर स्थित यह हिन्दुओं का पवित्र स्थल माना जाता है जिसमें एक शिव मंदिर है और खूबसूरत झरना भी। श्रीनगर से यह 61 किमी की दूरी पर है।

8.अमरनाथ गुफा : अमरनाथ की गुफा श्रीनगर से करीब 145 किलोमीटर की दूरी हिमालय पर्वत श्रेणियों में स्थित है। समुद्र तल से 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा 150 फीट ऊंची और करीब 90 फीट लंबी है। अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए 2 रास्ते हैं- एक पहलगाम होकर जाता है और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले यहां की यात्रा के दौरान भृगु ऋषि ने अमरनाथ की पवित्र गुफा और बर्फ के शिवलिंग को देखा था। मान्यता है कि तब से ही यह स्थान शिव आराधना और यात्रा का प्रमुख देवस्थान बन गया, क्योंकि यहां भगवान शिव ने तपस्या की थी। पुराण के अनुसार काशी में दर्शन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देने वाले श्री बाबा अमरनाथ के दर्शन हैं। और कैलाश को जो जाता है, वह मोक्ष पाता है। अमरनाथ की यात्रा महाभारत के काल से ही की जा रही है। बौद्ध काल में भी इस मार्ग पर यात्रा करने के प्रमाण मिलते हैं। इसके बाद ईसा पूर्व लिखी गई कल्हण की 'राजतरंगिनी तरंग द्वि‍तीय' में उल्लेख मिलता है कि कश्मीर के राजा सामदीमत (34 ईपू-17वीं ईस्वीं) शिव के भक्त थे और वे पहलगाम के वनों में स्थित बर्फ के शिवलिंग की पूजा करने जाते थे। इस उल्लेख से पता चलता है कि यह तीर्थ यात्रा करने का प्रचलन कितना पुराना है।

9.महामाया शक्तिपीठ : बहुत कम लोग जानते हैं कि कश्मीर में माता सती का एक बहुत ही जाग्रत शक्तिपीठ है जिसे महामाया शक्तिपीठ कहा जाता है। यदि आप कभी अमरनाथ गए होंगे तो निश्चित ही यहां के दर्शन किए होंगे। यह मंदिर भी अमरनाथ की पवित्र गुफा में ही है। पहलगांव के अमरनाथ में माता का कंठ गिरा था। इसकी शक्ति को महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं। यहां के दर्शन करने से जनम-जनम के पाप कट जाते हैं। अबकी बार यदि अमरनाथ बाबा के दर्शन करने जाएं तो इसके भी दर्शन जरूर करें।

10. पीओके के मंदिर POK Mamndir :
1.शिव मंदिर पीओके :- पाक अधिकृत कश्मीर में वैसे तो बहुत से मंदिरों का अस्तित्व अब नहीं रहा लेकिन यह शिव मंदिर अब खंडर ही हो चुका है। भारत-पाक बंटवारे के कुछ सालों तक यह मंदिर अच्छी अवस्था में था, लेकिन पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के बढ़ते प्रभाव के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन कम हो गया और अब यह मंदिर विरान पड़ा है।

2.शारदा देवी मंदिर, पीओके:- यह मंदिर भारत-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में है। यह मंदिर भी अब लगभग खंडहर में तब्दील हो चूका है। माना जाता है कि भगवान शंकर यहां से यात्रा करते हुए निकले थे। 1948 के बाद से इस मंदिर की बमुश्किल ही कभी मरम्मत हुई। इस मंदिर की महत्ता सोमनाथ के शिवा लिंगम मंदिर जितनी है। 19वीं सदी में महाराजा गुलाब सिंग ने इसकी आखिरी बार मरम्मत कराई और तब से ये इसी हाल में है।

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