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फूड सेफ्टी कमिश्नरेट ने मिलावटखोरों पर कसी नकेल, एक साल में 15 दोषियों को कैद एवं जुर्माना


चंडीगढ़ : तंदुरुस्त पंजाब मिशन के अंतर्गत लोगों को मानक भोजन मुहैया करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग का फूड सेफ्टी विंग नये ढंग अपना रहा है। यह जानकारी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर काहन सिंह पन्नू ने दी। स. पन्नू ने बताया कि एक तरफ़ फूड सेफ्टी कमिश्नरेट खाद्य पदार्थों के अधिक से अधिक नमूने लेकर मिलावटखोरों पर नकेल कस रहा है और साथ ही स्टेट फूड लैब से जांच करवाकर अपेक्षित कार्यवाही कर रहा है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2019 से जनवरी 2020 के बीच 15 दोषियों को 6 महीने की कैद के साथ-साथ हरेक दोषी को 50,000 रुपए जुर्माना लगाया गया। उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल के दौरान खाद्य पदार्थों के 8697 नमूने लिए गए जिनमें से 1720 नमूने घटिया दर्जे के पाए गए, जबकि 69 नमूने असुरक्षित पाए गए। मिलावटखोरों के खि़लाफ़ इस साल के दौरान 2162 केस दर्ज किये गए और उन पर 33003200 रुपए का जुर्माना लगाया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य ध्यान खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित है, इसलिए राज्य में कानून लागू किया जा रहा है और जागरूकता मुहिमें करवाई जा रही हैं। स. पन्नू ने बताया कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नरेट ने हर शुक्रवार को फूड बिजऩेस ऑपरेटरों की जागरूकता के लिए प्रशिक्षण शुरू किया है। इन कैंपों में फूड बिजऩेस ऑपरेटरों को सफ़ाई और खाद्य सुरक्षा के मानकों में सुधार करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। सरकार की अन्य नई पहलकदमियों में स्ट्रीट फूड वैंडर्ज़ प्रशिक्षण प्रोग्राम शामिल है जो कि ‘तंदुरुस्त पंजाब मिशन’ के अंतर्गत बठिंडा में शुरू किया गया है। स्ट्रीट फूड वैंडर्ज़ को इस प्रशिक्षण प्रोग्राम के अंतर्गत निजी और खाद्य पकाने वाली जगह की सफ़ाई और ग्राहकों को दिए जाने वाले भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा एफ.एस.एस.ए.आई. के सहयोग से अमृतसर में ‘वैरीफाईड मिल्क वैंडजऱ् स्कीम’ नामक एक प्रोजैक्ट शुरू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत सभी दूध विक्रेता रजिस्टर्ड किये जा रहे हैं। रजिस्टर्ड दूध विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और मापदंडों के विभिन्न पहलूओं संबंधी प्रशिक्षण दिया जायेगा। हरेक रजिस्टर्ड विक्रेता को एक पहचान पत्र जारी किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि भोजन पकाने के लिए विक्रेताओं द्वारा दो बार से अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले तेल में ट्रांस-फैट होते हैं जो मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इस्तेमाल किए जा चुके पकाने वाले तेल का निपटान हमेशा एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या के हल के लिए पंजाब सरकार ने एक ऐसी कंपनी के साथ समझौता किया है जो इस्तेमाल किए गए भोजन पकाने वाले तेल को विक्रेताओं से खऱीदती है और इसको बायो डीज़ल में बदल देती है। उन्होंने कहा कि बायो डीज़ल बनाने के लिए हर महीने पंजाब से लगभग 100 टन इस्तेमाल किए गए पकाने वाले तेल की खरीद की जा रही है।