Last Updated: November 5, 2026

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स्टडी में खुलासा: इंसानी गतिविधियों से डल-निगीन झीलों में बढ़ रहा प्रदूषण, फॉस्फेट का स्तर चिंताजनक

September 3, 2026

स्टडी में खुलासा: इंसानी गतिविधियों से डल-निगीन झीलों में बढ़ रहा प्रदूषण, फॉस्फेट का स्तर चिंताजनक

श्रीनगर: श्रीनगर की मशहूर डल और निगीन झीलों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है। स्टडी के अनुसार, इन झीलों में प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजह इंसानी गतिविधियां हैं। घरों से निकलने वाला सीवेज, डिटर्जेंट, खेती में इस्तेमाल होने वाले फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के अवशेष झीलों के पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

स्टडी में दोनों झीलों के पानी में फॉस्फेट का स्तर काफी ज्यादा पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में पोषक तत्वों की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर झील के प्राकृतिक संतुलन और जलीय जीवन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

डल झील में फॉस्फेट का स्तर ज्यादा

स्टडी के मुताबिक, डल झील में फॉस्फेट की मात्रा 5.10 mg दर्ज की गई। वहीं, निगीन झील में यह स्तर 4.22 से 4.99 mg के बीच पाया गया। स्टडी में फॉस्फेट के बढ़े स्तर के पीछे मुख्य रूप से घरेलू सीवेज, डिटर्जेंट से निकलने वाला पानी, खेती में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक और कीटनाशकों के अवशेष को जिम्मेदार बताया गया है।

डल झील में प्रदूषण का बोझ ज्यादा

स्टडी में यह भी सामने आया कि निगीन झील की तुलना में डल झील में पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा ज्यादा पाई गई। पार्टिकुलेट मैटर बेहद छोटे कण होते हैं, जो हवा या पानी में मौजूद हो सकते हैं। स्टडी के अनुसार, यह स्थिति संकेत देती है कि डल झील के कुछ हिस्सों में प्रदूषण का दबाव अधिक है। डल झील का आकार बड़ा होने के साथ-साथ यहां मानवीय और पर्यटन गतिविधियां भी ज्यादा होती हैं।

सीवेज और कचरे की समस्या पर ध्यान जरूरी

स्टडी में कहा गया है कि अगर बिना उपचार वाला या ठीक से प्रबंधित नहीं किया गया ठोस और तरल कचरा झीलों में पहुंचता रहा, तो इससे पानी की गुणवत्ता लगातार खराब हो सकती है। घरों का गंदा पानी, डिटर्जेंट वाला पानी और खेती से निकलने वाला रासायनिक पानी अपने साथ फॉस्फेट और दूसरे पोषक तत्व झीलों तक पहुंचा सकता है। इससे झील के प्राकृतिक वातावरण में बदलाव आ सकता है। फॉस्फेट की अधिक मात्रा विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि ज्यादा पोषक तत्व पानी की गुणवत्ता को खराब करने के साथ-साथ झील के पारिस्थितिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

नियमित निगरानी की सिफारिश

स्टडी में डल और निगीन झीलों के पानी की नियमित जांच और निगरानी करने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर में होने वाले बदलावों को समय रहते पहचानना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों का पता लगाना है। स्टडी में यह भी कहा गया है कि केवल समय-समय पर झीलों की सफाई करना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी पता लगाना जरूरी है कि सीवेज, घरेलू गंदा पानी, ठोस कचरा और कृषि रसायनों के अवशेष किन रास्तों से लगातार झीलों में पहुंच रहे हैं।

श्रीनगर के लिए क्यों अहम हैं ये झीलें?

डल और निगीन झीलें श्रीनगर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनसे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और शहर की पर्यावरणीय व्यवस्था जुड़ी हुई है। स्टडी के निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अगर प्रदूषण को उसके स्रोत पर नियंत्रित नहीं किया गया, तो बढ़ती मानवीय गतिविधियों का इन झीलों की लंबे समय की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए झीलों को साफ रखने के साथ-साथ सीवेज प्रबंधन, कचरा नियंत्रण, कृषि रसायनों के इस्तेमाल और प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी करना जरूरी होगा।

📍 Location: Srinagar (Srinagar)

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