35वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेलाःमुख्य आकर्षणों में वैष्णो देवी मंदिर, अमरनाथ मंदिर की रहेंगी प्रतिकृतियां

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फरीदाबाद : फरीदाबाद में लगाए गए 35 वे सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2022 के आगाज के साथ ही वहां भीड़ का हुजूम उमड़ने लगा है। इस बार जम्मू एवं कश्मीर 35वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2022 का थीम स्टेट है, इसलिए वैष्णो देवी मंदिर, अमरनाथ मंदिर, कश्मीर से वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करने वाले अपना घर, हाउस बोट का लाइव प्रदर्शन और स्मारक द्वार मुबारक मंडी-जम्मू की प्रतिकृतियां मुख्य आकर्षण रहेंगे। जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों कलाकार विभिन्न लोक कलाओं और नृत्यों का प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक नृत्य कला रूपों से लेकर उत्कृष्ट शिल्प तक, जम्मू-कश्मीर की विरासत और संस्कृति का एक गुलदस्ता विभिन्न कला रूपों और हस्तशिल्प के माध्यम से अनूठी संस्कृति और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाले इस मेले का मुख्य आकर्षण रहेगा।

हजारों शिल्पकारों को मिलता है एक मंच

इस मेले के माध्यम से, भारत भर के हजारों शिल्पकारों को अपनी कला और उत्पादों को व्यापक दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने के लिए एक सुनहरा मंच मिलता है। यह मेला भारत के विरासत शिल्प को पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूरजकुंड शिल्प मेले के इतिहास में एक बेंचमार्कस्थापित हुआ जब इसे वर्ष 2013 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपग्रेड किया गया था। 2020 में, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के 30 से अधिक देशों ने मेले में भाग लिया। इस वर्ष भी 30 से अधिक देश इस मेले का हिस्सा बनेंगे, जिसमें पार्टनर नेशन – उज्बेकिस्तान शामिल है। लैटिन अमेरिकी देशों, अफगानिस्तान, इथियोपिया, इस्वातिनी, मोजाम्बिक, तंजानिया, जिम्बाब्वे, युगांडा, नामीबिया, सूडान, नाइजीरिया, इक्वेटोरियल गिनी, सेनेगल, अंगोला, घाना, थाईलैंड, नेपाल, श्रीलंका, ईरान, मालदीव और अन्य देशों से भी उत्साही भागीदारी होगी।

अपना घर हरियाणा के लोगों की जीवन शैल

हरियाणा का एक परिवार हरियाणा की प्रामाणिक जीवन शैली को प्रदर्शित करने के लिए विशेष रूप से बनाए गए अपना घर में रहने जा रहा है। अपना घर आगंतुकों को राज्य के लोगों की जीवन शैली का अनुभव करने का मौका देता है। उन्हें अपनी संस्कृति के बारे में बातचीत करने और सीखने का मौका भी देता है। अपना घर में पारंपरिक मिट्टी के बर्तन आदि दिखाए जाएंगे और शिल्पकार इन पारंपरिक शिल्पों का जीवंत प्रदर्शन करेंगे ।

दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकारों का शानदार प्रदर्शन

आगंतुकों के मूड को जीवंत करने के लिए भारत के राज्यों के कलाकारों सहित भाग लेने वाले विदेशों के अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकारों द्वारा शानदार कार्यक्र म प्रस्तुत किए जाएंगे। पंजाब के भांगड़ा, असम के बिहू, बरसाना की होली, हरियाणा के लोक नृत्य, हिमाचल प्रदेश के जमाकड़ा, महाराष्ट्र का लावणी, हाथ की चक्की का लाइव प्रदर्शन और हमेशा से मशहूर रहे बहरु पिया जैसे विभिन्न प्रकार के कलाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। मेला पखवाड़े के दौरान चौपाल पर शाम 7 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्र मों से दर्शकों का मनोरंजन होगा। रहमत-ए- नुसरत, रिंकू कालिया की गज़ल, डांस परफॉर्मेंस, भावपूर्ण सूफी परफॉर्मेंस, माटी बानी द्वारा रिदम ऑफ इंडिया, जम्मू-कश्मीर, उजबेकिस्तान और अन्य अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों के फुट-टैपिंग डांस और सॉन्ग शो जैसे बैंड के शानदार प्रदर्शन का दर्शक आनंद ले पाएंगे।

खेलना आता नहीं, हम यूं ही बदल रहे हैं मोहरे

हमें क्या खेलना आता है, हम तो वैसे ही मोहरे बदल रहे हैं। शायद खेलना तुम भी नहीं जानते और हमारी फोटो खींच रहे हो। सूरजकुंड की धरती पर हर्षोल्लास और ढोल बाजे की थाप पर शुरू हुए 35वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का अवलोकन करते हुए हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय व मुख्यमंत्नी मनोहर लाल उज्बेकिस्तान की स्टाल पर शतरंतज खेल रहे थे तो सीएम साहब मजाक में कुछ ऐसा कहा। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने वीवीआईपी गेट दंतेश्वरी द्वार पर फीता काटकर मेले का आगाज किया। चार अप्रैल तक जारी रहने वाले इस मेले में इस बार स्टेट थीम बनाए गए जम्मू-कश्मीर व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी देश उज्बेकिस्तान की मेले में विशेष भागेदारी रहेगी। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय व मुख्यमंत्नी मनोहर लाल ने अपने सहयोगी केंद्रीय विद्युत एवं भारी ऊर्जा मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर, परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा व उज्बेकिस्तान के राजदूत दिलशोद ओख्तोव के साथ गोल्फ कार्ट में बैठकर मेले की सैर की। यहां ढप, नगाड़े, बीन, चंग, ढोल, सारंगी बजा रहे सैंकड़ों कलाकारों ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एवं सूरजकुंड मेले के वाइस चेयरमैन एमडी सिन्हा उन्हें एक-एक स्टाल का अवलोकन करवा रहे थे। मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने सबसे पहले कश्मीर पैवेलियन का अवलोकन किया।