चुनाव में पिटी कांग्रेस को गांधी की याद आई, अगले महीने साबरमती और चंपारण से निकालेगी यात्रा

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जिस गांधी नेहरू विरासत के जरिए कांग्रेस पिछले 75 सालों में 50 साल इस देश की सत्ता पर काबिज रही।आज पांच राज्यों में चुनाव हारने के बाद एक बार फिर कांग्रेस को उसी गांधी का सहारा अपनी खोई हुई सियासी जमीन को पाने के लिए लेना पड़ रहा है। कांग्रेस अगले महीने से आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर दो बड़ी यात्राएं निकालने जा रही है जिसका उद्देश्य गांधी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना है।

कांग्रेस पार्टी आगामी 6 अप्रैल से गुजरात के साबरमती आश्रम से आजादी गौरव यात्रा निकालने जा रही है जिस का समापन 1 जून को दिल्ली में होगा। इसी तरह से दूसरी यात्रा बिहार के चंपारण से 17 अप्रैल को शुरू होकर पश्चिम बंगाल के बलिया घाट में 27 मई को खत्म होगा। इस यात्रा का नाम गांधी संदेश यात्रा रखा गया है। पहली यात्रा भारत 100 किलोमीटर की होगी जो 60 दिनों तक चलेगी। जबकि दूसरी यात्रा 800 किलोमीटर की होगी और इसके लिए 40 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। इन दोनों यात्राओं का आयोजन कांग्रेसका सेवादल और यूथ कांग्रेस करेगा। इन यात्राओं में एक वक्त में 75 लोग शामिल होंगे जो लगातार चलते रहेंगे। जबकि संबंधित प्रदेश इकाई उस यात्रा के आयोजन में पूरा सहयोग करेंगे। पहली यात्रा गुजरात राजस्थान हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। जबकि दूसरी यात्रा में बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल की प्रदेश इकाइयों शामिल रहेंगे।

कांग्रेस पार्टी इसी तरह की यात्राओं का आयोजन दक्षिण में और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी करने जा रही है। इस यात्रा के आयोजन को लेकर आज दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में संबंधित राज्यों के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें बिहार झारखंड गुजरात हरियाणा दिल्ली के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने कहा इस यात्रा का उद्देश्य गांधी की विचारधारा और आजादी के आंदोलन से संबंधित इतिहास को जन-जन तक पहुंचाना है।

दरअसल कांग्रेस पार्टी स्वाधीनता आंदोलन और गांधी नेहरू विरासत को अपनी सबसे बड़ी सियासी पूजी मानती रही है। इसी पूजी के सहारे चुनावी राजनीति में दिल्ली की सत्ता पर एक लंबे अरसे तक वह काबीज भी रहे है। लेकिन आज के दौर में स्वाधीनता आंदोलन के महानायकों को दूसरे राजनीतिक पार्टियां हाईजैक कर रही है। जिस पर कल तक कांग्रेस अपना कॉपी राइट मानती थी।

कांग्रेस का उद्देश्य इन यात्राओं के जरिए न सिर्फ अपनी पुरानी पहचान और इतिहास से जुड़ना चाहती है बल्कि अपने जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पार्टी को लगता है इस दौर में जब सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने महानायक चुन लिए है, कांग्रेस भी गांधी को भुना कर देश की राजनीति में अपने खोए सियासी जनाधार को पा लेगी। लेकिन कांग्रेस की राह सिर्फ यात्राओं से आसान नहीं होगी। उसे अगर इस यात्रा को मंजिल तक पहुंचना है तो गांधी के साथ बदलते वक्त के साथ पटेल,अंबेडकर,नेताजी और भगत सिंह को भी साथ लेकर चलना होगा।