Shiv Aur Shankar: एक ही है शिव और शंकर! जानिए दोनों में क्या है अंतर

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सोमवार का दिन भगवान शिव जी को समर्पित होता है। भगवान शिव बहुत नामों से पुकारते है। कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम मानते हैं। परन्तु तस्वीरों में दोनों की आकृति अलग-अलग है। कई जगह तस्वीरों में शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए चित्रित किया गया है। भगवान शिव का नाम भगवान शंकर के साथ जोड़ा जाता है। इसलिए हम लोग शिव, शंकर, भोलेनाथ कह कर उन्हें पुकारते हैं। भगवान शंकर को ऊंचे पर्वत पर तपस्या में लीन बताया जाता है। जबकि भगवान शिव ज्योति बिंदु के स्वरूप हैं। जिनकी पूजा ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है।

पुराणों में भगवान शिव के 3 प्रमुख कर्तव्य बताए गए हैं – सत युगी दुनिया की स्थापना करना, दैवीय दुनिया की पालना करना और पतित दुनिया का विनाश करना, यह तीनों कर्तव्य भगवान शिव तीन प्रमुख देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शंकर (महेश) के द्वारा करवाते हैं. इसीलिए भगवान शिव को त्रिमूर्ति भी कहा जाता है. भगवान शिव जन्म मरण के चक्र या बंधन से मुक्त हैं. जबकि शंकर साकारी देवता हैं. भगवान शंकर को आदिदेव महादेव भी कहा जाता है. भगवान शिव, शंकर में प्रवेश करके महान से महान कार्य करवाते हैं.

ऐसे कार्य जिन्हें कोई देवी देवता, साधु संत, महात्मा नहीं कर सकते, इसके अलावा भगवान शिव सत्य ज्ञान देकर सत्ता चरण की धारणाओं को भगवान ब्रह्मा द्वारा पृथ्वी पर स्थापित करते हैं. भगवान शिव एक निराकार ज्योति बिंदू स्वरूप हैं जबकि शंकर साकार हैं.