Haryana Roadways की बसों के लिए Petrol-Diesel पंपों से जाएगा खरीदा

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चंडीगढ़ : थोक डीजल के रेट बढ़ जाने के कारण बाजार से खरीदे जाने वाले डीजल रेट में ज्यादा अंतर आ जाने के कारण हरियाणा सरकार ने फैसला किया है कि हरियाणा रोडवेज की बसों के लिए डीजल तेल कंपनियों के बजाए पेट्रोल पंपों से खरीदा जाएगा। इसके लिए रोडवेज डिपो के संबंधित महाप्रबंधक की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। यह कमेटी पेट्रोल पंपों से कोटेशन मांगेंगी। जिसका रेट सबसे कम होगा, उससे डीजल खरीदा जाएगा।

नजदीकी हो पेट्रोल पंप :

निर्देशों में कहा गया है कि सफलतापूर्वक बोलीदाता का चयन करते समय बसों को भरने के लिए पेट्रोल पंप के साथ क्षेत्र का ध्यान रखा जाए। अगर एक से ज्यादा बोलीदाता एक जैसे न्यूनतम रेट पर हैं तो बस डिपो से दूरी को ध्यान में रखा जाए। फिर भी पेट्रोल पंपों पर लाइनें लगने से बचने के लिए एक से ज्यादा पेट्रोल पंपों का चयन किया जा सकता है, बशर्ते न्यूनतम रेट एक जैसा हो और डिपो, सब डिपो से दूरी में ज्याद अंतर न हो। डिपो से पांच किलोमीटर और सब डिपो से 10 किलोमीटर दूर से ज्यादा पेट्रोल पंप नहीं होना चाहिए। महाप्रबंधक हर रोज इस सिस्टम की समीक्षा करेंगे। साथ में सिस्टम शुरू होने की रिपोर्ट भेजें और साप्ताहिक रिपोर्ट मुख्यालय भेजें। किसी भी दिक्कत के लिए मुख्यालय से संपर्क करें।

किलोमीटर स्कीम के तहत 510 बसों को रोडवेज की तरफ से दिया जाता है डीजल :

किलोमीटर स्कीम के तहत लीज पर ली गई 510 बसों को डीजल राज्य परिवहन की तरफ से दिया जाता है क्योंकि समझौते में इसका उल्लेख है। इसे मंत्रिमंडल से मंजूरी मिली हुई है। जबकि 190 बसों को डीजल स्वयं भरना होता है क्योंकि उनके समझौते में यह लिखा हुआ है।

पांच किलोमीटर के दायरे वाले पेट्रोल पंपों से खरीदना होगा :

राज्य परिवहन निदेशालय से सभी महाप्रबंधकों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि महाप्रबंधकों की अध्यक्षता में वर्क्‍स मैनेजर, ट्रैफिक मैनेजर, एसपीओ, एसपीए, अकाउंट अफसर, आरएसओ की कमेटी गठित की जाए और कार्यवाही का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। यह कमेटी तुरंत सभी पेट्रोल पंप मालिकों को बुलाएं ताकि प्रक्रिया में भाग ले सकें। सूचना दिए जाने का रिकॉर्ड रखा जाए। सीलबंद कोटेशन आमंत्रित की जाएं। यह कमेटी इन कोटेशनों को खोले और एल-1, एल-2, एल-3 फर्मो को बुलाकर उनसे मोलभाव करे। मगर यह सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक हो ताकि सस्ता रेट लिया जा सके। सभी फॉर्मलिटीज अपनाई जाएं। केंद्र और राज्य सरकार के किसी भी नियम, कानून की उल्लंघना नहीं होनी चाहिए। नए खरीद सिस्टम की 15 दिन बाद समीक्षा की जाएगी। किसी के साथ 15 दिन से ज्यादा खरीदने की कमिटमेंट न की जाए।